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केयू में पर्यावरण प्रदूषण के लिए खर्च हो रहे हैं डेढ़ करोड़ रुपये!

Fri, 27 Dec 2013 12:40 AM IST
कुरुक्षेत्र
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देश की एक ग्रेड यूनिवर्सिटी पर्यावरण को प्रदूषण के लिए डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करती है या स्वच्छता के लिए? यह सवाल कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के स्वच्छता प्रबंधन के तरीकों पर उठ रहे हैं।

 दरअसल, सफाई व्यवस्था पर केयू में सालाना डेढ़ करोड़ रुपये का बजट खर्च होता है, लेकिन इतनी भारी भरकम खर्च के बावजूद कूड़े और कचरे को जलाया जा रहा है।

इससे पर्यावरण प्रदूषण तो फैल ही रहा है, वहीं, यूनिवर्सिटी की यह चूक कैंपस में रहने वालों के लिए भी घातक है। केयू प्रशासन आंखें बंद कर बैठा है।

इससे ज्यादा विडंबना और क्या होगी कि साल भर यूनिवर्सिटी में चलने वाली गतिविधियों में पर्यावरण जैसे मुद्दों पर सेमीनार और कार्यशालाओं एवं अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण का ज्ञान दिया जाता है, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन खुद इन पर अमल नहीं करता है।
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केयू में सफाई व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी कूड़ा उठाने के बजाये उसे आग के हवाले कर रहे हैं। इससे जहां वातावरण प्रदूषण हो रहा है वहीं, केयू की सुंदरता और हरियाली पर भी ग्रहण लग रहा है।

केयू के ओपन थिएटर के पीछे लगाते हैं आग
केयू परिसर में सफाई करने के साथ यहां से एकत्रित किया गया कूड़ा ओपन थियेटर के पीछे डंप कर इसमें आग लगा दी जाती है। वीरवार को यहां आग की लपटें और धुएं के गुब्बार साफ देखे जा सकते थे। प्लास्टिक और पॉलीथिन के अलावा अन्य कई घातक वस्तुएं भी आग में जलाई जा रही हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही हैं। केयू के छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि कचरे को जलाने से निकलने वाले धुएं के कारण उन्हें हॉस्टल की लॉबी और कई बार कमरे में बैठने में भी मुश्किल होती है। विद्यार्थियों के अनुसार, इस परेशानी से वे रोजाना दो चार होते हैं, जिसकी सूचना उन्होंने केयू हॉस्टल प्रशासन को भी दी है। बावजूद इसके अधिकारियों का इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं है।


हॉस्टल में नहीं एक भी कूड़ादान
रणबीर, भगवान सिंह, स्वामी विवेकानंद, सुभाष भवन में कूड़ादान नहीं है। विद्यार्थियों ने मांग की है कि इन हॉस्टलों में प्रशासन कूड़ेदान रखवाए। विद्यार्थियों ने बताया कि कूड़ेदान न होने की वजह से उन्हें कूड़ा यहां वहां फेंकना पड़ता है, जिससे अव्यवस्था फैलती है। वहीं, रणबीर हॉस्टल के सुपरवाइजर अनिल ने बताया कि हॉस्टल में कूड़ेदान लेकर आने का रास्ता नहीं है, जिस कारण हॉस्टल मेें कूड़ेदान नहीं रखा गया।

205 कर्मचारी, फिर भी सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं
केयू सेनेटरी विभाग में कच्चे, पक्के और ठेके पर लगे कर्मचारियों की कुल संख्या 205 है। इसके बावजूद अव्यवस्था का यह आलम केयू परिसर में रोजाना देखा जा सकता है। वहीं, केयू परिसर में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 175 कूड़ेदान रखे गए है। इन कूड़ेदानों में से 15 कूड़ादान 45-45 हजार रुपये, 100 कूड़ादान चार-चार हजार और 60 कूड़ेदान पांच-पांच हजार रुपये के हैं।

एक सप्ताह में भीतर नए कूड़ेदान रखे जाएंगे
चीफ वार्डन डॉ. सतदेव ने बताया कि अभी केयू परिसर में कई स्थानों पर सफाई अभियान जारी है। वहां पर पार्क बनाए जाएंगे। एक सप्ताह के भीतर रणबीर, स्वामी विवेकानंद, शहीद भगत और सुभाष चंद्र इंटरनेशनल हॉस्टल में कूड़े दान रखे जाएंगे। जिन हॉस्टलों में पार्क बनाए जा सकते है वहां पर पार्क भी बनवाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जिन हॉस्टलों में कूड़ेदान नहीं हैं वहां के सफाई कर्मचारियों को आदेश दिए गए हैं कि सफाई के बाद कचरे को इकट्ठा करके जो भी पास वाला कूड़ेदान हो, उसी में कूड़ा डाले।

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का उल्लंघन
कूये में कूड़ा जलाकर म्यूंसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रुल-2000 का उल्लंघन किया जा रहा है। क्योंकि इसके अनुसार कूड़े में आग लगाना प्रतिबंधित है। यह प्रतिबंध इसलिए लगाया गया था, क्योंकि कूड़े में बड़ी मात्रा प्लास्टिक, थरमोकॉल, कागज, रबड़, कपड़े, पालीथिन शामिल होता है और इसे जलाने से सल्फर आक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, कार्बनडाइऑक्साइड, क्लोरिनफ्रीरेडिकल, पार्टीकूलेटमैटर, कारसीनोजैनिक डाईऑक्सीन गैस निकलती है, जिससे कैंसर होता।
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वर्ष 2011 में दिया था केयू को प्रपोजल
पर्यावरण विशेषज्ञ डा.नरेश भारद्वाज के मुताबिक ग्रीन अर्थ एनजीओ ने वर्ष 2011 में केयू को प्रपोजल दिया था कि कूड़े को आग न लगाकर, खाद में बदला जाए, जिसमें एनजीओ उनका सहयोग करेगा। इससे केचुआं खाद और रीसाइक्लिंग के लिए तकनीकी सहयोग दिया जाएगा। जिसके एनजीओ आज भी तैयार है।
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