प्रदेशभर के राइस मिलों को सरकारी एजेंसियों ने अपनी कस्टडी में ले लिया है। सोमवार देर रात एडिशनल कमिश्नर ने सभी जिलों के डीसी से वीडियो कांफ्रेंस कर राइस मिलों की निगरानी के निर्देश दिए। जिसके बाद फूड व सप्लाई, हैफेड व वेयर हाउस के अधिकारियों की देखरेख में सभी राइस मिलों के बाहर पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए। पुलिस और अधिकारियों को हिदायत है कि अगले आदेश तक मिल में किसी भी व्यक्ति व वाहन को अंदर से बाहर या फिर बाहर से अंदर आने दिया जाए।
दरअसल सोमवार को कैबिनेट की मीटिंग में राइस सेलर की ओर से चावल को लेकर की जाने वाली गड़बड़ी का मामला उठा था। धान खरीद में गड़बड़ी के इनपुट मिलने के बाद सरकार हरकत में आई और आनन-फानन में सरकारी खरीद के धान की मिलिंग करने वाले राइस मिलों के स्टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन का फैसला लिया गया। इससे राइस मिल संचालकों में रोष बन गया है। हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधान हंसराज की अगुवाई में मंगलवार को मुख्यमंत्री से मिलने चंडीगढ़ पहुंचा, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। उन्होंने कैबिनेट मंत्री कंवरपाल गुर्जर से मुलाकात की। उन्होंने आश्वासन दिया है कि बुधवार सुबह उनकी समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
वहीं, मिल संचालकों ने सरकार और अफसरों पर बिना वजह परेशान करने का आरोप लगाया है। यह कार्रवाई दस दिन तक चलेगी। इस दौरान किसी तरह का व्यापार राइस मिल मालिक नहीं कर सकेंगे।
फूड एंड सप्लाई विभाग के अनुसार प्रदेश की मंडियों में अब तक 70.24 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की आवक हुई। कुल आवक में से सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा 63.80 लाख मीट्रिक टन और मिलरों व डीलरों की ओर से 6.43 लाख मीट्रिक टन की खरीद की गई है। फूड सप्लाई डिपार्टमेंट ने 34.71 लाख मीट्रिक टन, हैफेड ने 19.76 लाख मीट्रिक टन, हरियाणा भंडागार निगम ने 9.28 लाख मीट्रिक टन और भारतीय खाद्य निगम ने 4,718 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि पिछली बार केवल 55 लाख मीट्रिक टन धान ही खरीदा गया। इस बार इसमें काफी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।
दरअसल, डीएफएससी, हैफेड व वेयर हाउस द्वारा किसानों से धान खरीद कर चावल निकालने के लिए राइस मिलों को दिया जाता है। इसके बदले में सरकार को प्रति क्विंटल जीरी पर 67 किलो के हिसाब से चावल लौटाया जाता है। चावल निकालने के लिए प्रति क्विंटल दस रुपये का कमीशन और एक फीसदी की ड्रायर छूट दी जाती है। इसमें ही घपले की आशंका सरकार को है। बताया जा रहा है कि कुछ राइस मिलर खरीद का फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर लेते हैं। हकीकत में धान खरीदी नहीं की जाती और अन्य राज्यों से सस्ता चावल खरीदकर कर सरकार को भेज दिया जाता है। इसके अलावा कुछ राइस मिलर दूसरे प्रदेशों से सस्ता चावल खरीदकर स्टॉक पूरा कर लेते हैं। इससे वह जीरी की कुटाई करने से बच जाते हैं।
टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन होनेे है। उच्चाधिकारियों की तरफ से राइस मिलर्स की निगरानी के निर्देश मिले हैं। अगले आदेशों का इंतजार है। तब तक यहां कर्मचारियों की ड्यूटी रहेगी।-राजेश आर्या, डीएफएससी
-मिलर्स को बिना वजह के परेशान किया जा रहा है। हर साल स्टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन होती है। मिलर्स की तरफ से कभी एतराज नहीं किया गया, लेकिन आधी रात को मिल में पुलिस भेजना गलत है। प्रदेश के सभी राइस मिलर्स इसका विरोध करते हैं। मुख्यमंत्री से मिलने के लिए चंडीगढ़ गए थे, लेकिन मुलाकात हो नहीं पाई। कैबिनेट मंत्री कंवरपाल गुर्जर से मुलाकात की है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि बुधवार सुबह तक स्थिति साफ कर दी जाएगी।-प्रवीण अग्रवाल, प्रधान, राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन