तीन दिन के रिमांड के दौरान एसआईटी की अलग-अलग टीमों ने यूपी के कई जिलों में दबिश दी, पर पुलिस आरोपियों के कब्जे से एक रुपया भी बरामद नहीं कर पाई। पुलिस ने 25 लाख रुपये के बयाना के कागजात व गाड़ियां जरूर बरामद की हैं। अब सवाल यह है कि जिन लोगों के पैसे ठगे गए हैं, वे आखिर कहां जाएं?
पुलिस ने लंबी तफ्तीश के बाद ठगी मामले में तरावड़ी निवासी विजय कुमार, अरविंद कुमार निवासी मोहदीनपुर करनाल, सोनीपत ज्ञान नगर निवासी रमेश चंद्र बंसल, हरीसिंह पुरा घरौंडा निवासी शिवधन, राजपाल निवासी दुर्गा कालोनी करनाल, अमरिंद्र सिंह निवासी रामनगर करनाल को काबू किया। सभी आरोपियों को रिमांड के दौरान चार बीट कारें और जमीन खरीदने के लिए 25 लाख रुपये का बयाना कब्जे में लिया है। खास बात यह है कि पूरे मामले में ठगी का आंकलन 60 करोड़ रुपये माना जा रहा है, लेकिन पुलिस तीन दिन के रिमांड के दौरान आरोपियों के कब्जे से एक रुपया भी बरामद नहीं कर पाई। पुलिस की टीमें आरोपियों को लेकर यूपी के कई जिलों में गई, लेकिन आरोपी लगातार पुलिस को गुमराह करते रहे। ठगी के आरोपी इतने शातिर हैं कि उन्होंने पुलिस को किसी भी तरह से रास्ता नहीं दिया। आरोपी पुलिस को बताते रहे कि उन्होंने पैसे अपने दोस्तों को दे रखे हैं तो कभी रिश्तेदारों को, तीन दिन में पुलिस प्रॉपर्टी के कुछ दस्तावेज बरामद करने तक ही सीमित रही। अब असल सवाल यह है कि एजेंटों ने तो अपनी जान बचाने के लिए आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करा लिया, लेकिन वे लोग कहां पर जाएं, जिनसे एजेंटों ने पैसे ले रखे हैं? पीड़ित लोग अब कंपनी और थानों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं और वे पुलिस और एजेंटों से अपने पैसे वापस मांग रहे हैं।
अदालत परिसर में पैसे मांगने पहुंचे पीड़ित
गरीब लोगों की कम रुपयों की किस्त बनाकर पांच साल में डबल रुपये करने का लालच देकर करोड़ों रुपये ठगने के आरोपियों को रविवार को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया, जहां से सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अहम बात यह रही कि जैसे ही पीड़ितों को पता लगा कि आरोपियों को अदालत में पेश किया जा रहा है तो काफी संख्या में पीड़िग लोग अदालत परिसर पहुंच गए। हालांकि, पीड़ित लोग आरोपियों से मिल नहीं सके, दूर से जरूर वे भला बूरा कहते रहे। पीड़ितों ने मीडिया से कहा कि वे आखिर कहां जाएं? उन्हें पैसे चाहिए।
गौरतलब है कि गत दिन जिला पुलिस ने मुगल कनाल में वर्ष 2009 में एक कंपनी के नाम कार्यालय खोलकर कंपनी में खाता खोलकर पांच साल बाद लोगों को पैसे डबल कर देने, एक साल बाद ब्याज समेत देने, रिटायरमेंट के बाद 24 हजार रुपये पेंशन, गाड़ी व कोठी देने जैसे लालच देकर सैकड़ों लोगों की पॉलिसी कर करोड़ों की ठगी मामले में छह नामजद आरोपियों को काबू किया था। पुलिस ने आरोपियों को अदालत में पेश कर ठगी की पैसे की रिकवरी करने, गिरोह के अन्य लोगों के बारे में पूछताछ व गिरफ्तार करने व अन्य कार्रवाई से संबंधित तीन दिन के रिमांड पर लिया था।
पीड़ितों की आंखें हुुई नम
अदालत परिसर पहुंचे रामसिंह, कर्मबीर व जयसिंह का कहना है कि आरोपी जेल में चले गए और एजेंट हमें मिल नहीं रहे हैं। आखिर पैसा तो हमारा गया है, हम अब कहां पर जाएं। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया, लेकिन रिमांड के दौरान उनसे एक रुपया भी बरामद नहीं कर पाई। पीड़ितों ने एसपी से मांग की कि उनके पैसे दिलाए जाएं। पॉलिसी धारकों ने अपना-अपना दुख सुनाया। किसी ने दिहाड़ी करके किस्त पूरी की हुई हैं तो किसी ने अपने वेतन से बच्चों की शादी करने के लिए पॉलिसी ली थी। अब रुपये डूबता देख कई पॉलिसी धारकों की आंखे नम हो गई।
एजेटों को दिए बड़े लालच
गरीब लोगों से करोड़ों रुपये ठगने वाले आरोपियों ने पूरी प्लानिंग के साथ फ्रॉड किया है। आरोपियों ने एजेंटों को मोटा कमिशन के साथ उनका वेतन व अन्य सुविधाएं दी, जिससे एजेंट भी लोगों को जोड़ने में पूरी मेहनत की। वर्ष 2009 से आरोपी गरीब लोगों को ठगने पर लगे रहे। जब लोगों की किस्त पूरी हो गई और डबल रुपये देने का मौका आया तो आमजन ने एजेंटों से संपर्क साधा तो उन्हें रुपये डूबते नजर आए। इससे लोगों के पांव तले की जमीन खिसक गई। अब आमजन को कानून पर ही उन्हें पैसे लौटने की उम्मीद लगी है।
तीन दिन के रिमांड के दौरान आरोपियों के कब्जे से कुछ प्रॉपर्टी दस्तावेज मिले हैं। आरोपियों ने कई और लोगों के नामों का खुलासा किया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और रुपये की रिकवरी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। छह आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, वहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
जितेंद्र गहलावत, डीएसपी, एसआईटी, करनाल