- अब फुल पेमेंट एग्रीमेंट की जगह पंजाब और हिमाचल से करवा रहे जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी
जितेंद्र नरवाल
करनाल। जिला योजनाकार की कार्रवाई के बाद भी शहर में अवैध कॉलोनियों का धंधा जारी है। कॉलोनाइजर अवैध कॉलोनी काट कर वहां मूलभूत सुविधाएं देने व पक्का मकान बनवाने की गांरटी तक दे रहे हैं। उनका दावा है कि उनकी कॉलोनी में प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसकी उन्होंने व्यवस्था पहले से कर रखी हैं। अगर कार्रवाई हो भी जाती है तो उसका हर्जाना कॉलोनाइजर वहन करेगा। कार्रवाई से बचाने की बात का कॉलोनाइजर एग्रीमेंट में लिखकर देने का दावा तक कर रहे हैं।
यहां तक कि अब अवैध कॉलोनियों में प्लॉट के फुल एंड फाइनल पेमेंट एग्रीमेंट की जगह कॉलोनाइजर पंजाब और हिमाचल से पॉवर ऑफ अटार्नी करवाने का हवाला भी दे रहे हैं। कच्ची कॉलोनियों में चौड़ी सड़कें, सीवर, पानी की पाइपलाइन, लाइट और सड़क से जोड़ने का दावा किया जा रहा है। तकरीबन सभी कॉलोनाइजरों ने अपनी अवैध कॉलोनियों के नक्शे तक बनवा लिए हैं। साइट पर बैठकर लोगों को प्लॉट बेचने का सिलसिला लगातार जारी है।
पहले प्लॉट लो और मकान बनाओ, भुगतान बाद में करना
अमर उजाला ने शहर में कई जगहों पर काटी जा रही अवैध कॉलोनियों का दौरा किया। कॉलोनाइजरों और उनके प्रतिनिधियों से भी बातचीत की। उन्होंने दावा किया कि किसी भी जगह प्लॉट लो और पहले उसे बना लो। मकान बनाने के बाद प्लॉट की कीमत का भुगतान कर देना। अगर इस बीच कोई भी डीटीपी या जिला प्रशासन की कार्रवाई होती है तो वे उसे खुद देखेंगे। कोई कार्रवाई होने नहीं दी जाएगी। फिर भी कार्रवाई होती है और मकान को गिरा दिया जाता है तो जो भी हर्जाना रहेगा वे खुद उसका भुगतान करेंगे। ये बात वे एग्रीमेंट में लिखकर देने के लिए तैयार हैं।
ग्राहक को नौ माह का दिया जाता है समय
कॉलोनाइजरों ने दावा किया कि कॉलोनी का हर प्रोजेक्ट 100 से 200 करोड़ रुपये का होता है। पहले किसानों से जमीन ली जाती है, जिसका आधा भुगतान किया जाता है। इसके बाद वे बकाया कीमत देने के लिए एक साल का समय लेते हैं। इसी बीच कॉलोनी में कच्ची सड़कें निकाल कर प्लाटों का नक्शा तैयार कर इसे मार्केट में बेचने लगते हैं। इस दौरान ग्राहकों को सभी मूलभूत सुविधाएं देने का पक्का वादा किया जाता है। प्लाट के भुगतान के लिए ग्राहक को चार से लेकर नौ माह तक का समय दिया जाता है। भरोसा दिलाया जाता है कि अगर फिर भी लेट हुए तो वे एडजस्ट करवा देंगे। छोटे प्रोजेक्ट में करीब 100 करोड़ तक और बड़े प्रोजेक्ट में 200 करोड़ या इससे ज्यादा का व्यापार हो जाता है।
कैथल रोड :
कैथल रोड पर केंद्रीय विद्यालय के पास करीब 15 एकड़ में अवैध कॉलोनी काटी जा रही है। यहां फ्रंट में प्लाटों के रेट 35 से 40 हजार रुपये प्रति गज हैं जबकि पीछे 20 से 25 हजार में प्लाट दिए जा रहे हैं। दो भागों में काटी जा रही इस अवैध कॉलोनी का एक रास्ता कैथल रोड से लगता है जबकि दूसरा रास्ता डबरी गांव वाली सड़क से लगता है। यहां करीब ढाई सौ प्लाट काटे गए हैं जिसका नक्शा भी तैयार किया गया है। ग्राहकों को लुभाने के लिए यहां 40 फीट की सड़क सामुदायिक केंद्र, पार्क, मंदिर की भी जगह दिखाई गई है। इनमें कुल एरिया करीब 60 हजार गज दिखाया गया है जिसमें से 32 हजार गज के प्लॉटों का नक्शा है।
मूनक रोड :
घोघड़ीपुर पुल से उतरने के बाद हकीकत नगर के पास भी करीब आठ एकड़ जमीन पर अवैध कॉलोनी काटी जा रही है। यहां निर्माण कार्य भी चल रहे हैं। कॉलोनी में सड़क के साथ लगती जमीन पर 150 गज के शोरूम या दुकानों के लिए प्लाटिंग की गई है जबकि पीछे सारी रिहायशी प्लाटिंग है। आगे वाली दुकानों का रेट 45 हजार रुपये प्रति गज तक है जबकि पीछे वाली खाली प्लाटों का रेट 22 हजार रुपये प्रति गज निर्धारित किया गया है। यहां भी 40 से 50 फीट की सड़कें बनाने का कॉलोनाइजर दावा कर रहे हैं। हालांकि फिलहाल सड़क के लिए जगह दिखाई जा रही है लेकिन कोई भी सड़क पक्की नहीं है।
अवैध कॉलोनियों के खिलाफ जिला योजनाकार विभाग की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। अगर वहां फिर से अवैध कॉलोनी काटी जा रही हैं तो फिर से कार्रवाई होगी।
- गुंजन वर्मा, डीटीपी, करनाल