करनाल। हर खेल में खिलाड़ी का सपना होता है कि वह अपनी मेहनत और लगन के दम पर देश के लिए पदक जीतकर लाए और तिरंगे का मान बढ़ाए, जिसमें अधिकांश खिलाड़ी कामयाब भी हो जाते हैं। लेकिन कुछ खेल ऐसे भी हैं, जिसमें शुरूआती दौर में ही प्रशिक्षण के दौरान खिलाड़ी मामूली या गंभीर रूप से चोटिल हो जाते हैं और बेहतर मेडिकल सुविधा न होने की वजह से राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का खिलाड़ी का सपना टूट जाता है। यह बात अमर उजाला से बातचीत में अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर, एशियन गेम्स में पदक विजेता ओलंपियन सुमित सांगवान ने कही।
उन्होंने कहा कि हालांकि सरकारें खेल और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा देने को लेकर कई प्रकार की योजनाएं चला रही हैं। लेकिन यदि नर्सरी स्तर से ही हर खिलाड़ी के बेहतर इलाज के लिए मेडिकल इंश्योरेंस आदि की सुविधा दी जाए तो काफी हद तक चोटिल खिलाड़ियों का शुरुआत या बीच में खत्म होता कैरियर बचाया जा सकेगा।
कामयाबी के बाद तो कई मिल जाते हैं मददगार
सुमित ने कहा कि जब खिलाड़ी बढ़े स्तर पर पहुंचता है तो उसके साथ अलग से कोच, डॉक्टर और मैनेजर मिल जाता है, जो खिलाड़ी की हर समस्या का समाधान करते हैं। इतना ही नहीं कामयाबी के बाद तो बढ़े-बढे़ स्पॉन्सर भी मदद को आगे आ जाते हैं, लेकिन आज भी हमारे देश में चोट के चलते काफी खिलाड़ी शुरूआती दौर में ही खेल छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। अधिकतर खिलाड़ी चोट लगने पर सामान्य डॉक्टर को ही दिखाते हैं। जिसके चलते तत्काल तो दर्द से राहत मिल जाती है, लेकिन लंबे समय तक इस प्रकार के इलाज से खिलाड़ी खेल में अपना सौ प्रतिशत नहीं दे पाता। आज भी अधिकतर खिलाड़ी ग्रामीण परिवेश से आते हैं जो विशेषज्ञ डॉक्टर से अपना इलाज कराने में अक्षम होते हैं। इस कारण उनका खेल का सफर अधूरा ही रह जाता है। इसलिए जहां सरकारें इतना कुछ कर ही रही हैं तो शुरू से ही हर खिलाड़ी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं भी देना शुरू कर दे तो हमारे खिलाड़ी और बेहतर परिणाम दे सकेंगे।
देश-प्रदेश के लिए जीते कई पदक
गांव शेखपुरा निवासी 29 वर्षीय सुमित सांगवान ने अप्रैल 2012 में कजाकिस्तान, 2010 में एशियन गेम्स में रजत पदक और लंदन में हुए ओलंपिक खेलों में प्रतिभाग करने के साथ ही अपने अभी तक के खेल कॅरियर में देश और प्रदेश के लिए कई पदक जीते हैं। सुमित सांगवान की आंख में अभ्यास के दौरान चोट लग गई थी जिसका वह मुंबई में इलाज करा रहे हैं।