करनाल। कर्ण स्टेडियम में विभाग द्वारा सिंथेटिक ट्रैक पर सात करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद खिलाड़ियों को दो माह से अभ्यास नहीं करने दिया जा रहा है। यहां अभ्यास के लिए आने वाले खिलाड़ियों ने बताया कि सिंथेटिक ट्रैक पर सभी एथलेटिक्स गेम्स होते हैं। खेल विभाग की गाइडलाइन के अनुसार ट्रैक के गेट पर भी लिखा है कि सिंथेटिक ट्रैक पर अन्य गेम्स के खिलाड़ियों का जाना वर्जित है। जबकि एथलेटिक्स के खिलाड़ियों पर ही विभाग ने सिंथेटिक ट्रैक पर जाने की पाबंदी लगा दी है।
वहीं विभागीय अधिकारी खिलाड़ियों पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर एफआईआर तक करवा रही है। खिलाड़ी यूथ फॉर जस्टिस संगठन के सदस्य गौरव शर्मा का कहना है कि खेल विभाग द्वारा तुगलकी फरमान जारी कर कहा है कि यदि रात को खिलाड़ी सिंथेटिक ट्रैक पर अभ्यास करता है तो बिजली का बिल खुद वहन करना होगा जबकि शायद ही ऐसा कोई स्टेडियम हो जहां खिलाड़ी लाइट का बिल देते हों। जबकि फुटबाल के लिए रात में भी लाइटें जलाई जा रहीं हैं।
राजनीति का अड्डा बना स्टेडियम
खिलाड़ी कलवंत सिंह, लक्ष्य, विक्रांत का कहना है कि स्टेडियम खेलो इंडिया की तैयारी के लिए नहीं बल्कि खेल राजनीति कर रहा है। विभागीय अधिकारी घपलों में भी आगे हैं। उनका आरोप है कि यदि स्टेडियम में आए सामान की विजिलेंस जांच करवाई जाए तो भ्रष्टाचार की पोल खुलेगी।
हरियाणा एथलेटिक्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी राजकुमार का कहना है कि जब यहां पर एथलेटिक्स के इवेंट नहीं करवाए जाते तो फिर सिंथेटिक ट्रेक बनाना ही नहीं था, कम से कम सरकार को सात करोड़ रुपये की चपत तो नहीं लगती। जबकि एथलेटिक्स के सभी गेम्स एक साथ ही होते हैं।
जिला खेल अधिकारी दिलबाग सिंह मलिक का कहना है कि थ्रोर खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिये बस स्टैंड के पीछे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मैदान को देने के लिये जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा है। जैसे ही परमिशन मिलेगी वहां पर खिलाड़ियों को अभ्यास की अनुमति दी जाएगी।