लॉकडाउन में काम धंधा ठप होने के कारण लोगों को रोजी-रोटी चलाना मुश्किल हो रहा है। इधर, बिजली निगम बिजली खपत के नाम पर एडवांस में भी बिल मांग रहा है। हालात यह है कि कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन की वजह से बिजली खपत को जानने के लिए मीटर रीडिंग नहीं हो पाई। ऐसे में निगम की ओर से प्रोविजनल बिल जारी कर दिए गए। ये बिल कंप्यूटर सॉफ्टवेयर ने फिक्सड मैथर्ड के हिसाब से एस्टीमेट के आधार पर तैयार किए हैं। ऐसे में लोगों की शिकायतों से ये भी सामने आ रहा है कि जिसका पहले ढाई हजार रुपये तक बिल आता था, उनका इस बार 14 हजार रुपये से ज्यादा बिल आया है। मैसेज के माध्यम से भेजे गए बिल में मई माह के अंत तक भुगतान की तिथि भी दी गई है। इन लोगों का सरकार और बिजली निगम से सवाल है कि इंकम तो इन दिनों हो नहीं रही बिल कैसे भरें? वहीं बिजली निगम का भी दावा है कि रीडिंग के बाद बनने वाले बिल में ये पैसे एडजेस्ट हो जाएंगे। ज्यादा बिल देखकर घबराएं नहीं।
लोग बोले : सरकार राहत दे, कमाई है नहीं, फिर एडवांस वसूली क्यों?
प्रेम कॉलोनी निवासी अविनाश, सतबीर, सोनम, राम नगर के लोकेश, सदर बाजार के हरजीत का कहना है कि लॉकडाउन के कारण काम धंधे सभी के बंद हैं। घरों में बैठे हैं। इंकम नहीं हो रही। फिर सरकार बिल क्यों मांग रही है। क्या कुछ समय समय के लिए बिजली बिल को रोका नहीं जा सकता। अभी इस संकट के समय में भी एवरेज बेस पर ज्यादा बिल भेज तंग किया जा रहा है। एडवोकेट राजेश शर्मा का कहना है कि सरकार इस मामले में भी जनता को राहत दे। कमाई नहीं है, फिर बाद में एडजेस्टमेंट के नाम पर वसूली क्यों हो रही है?
जानिए... वो सब जो आपके लिए जरूरी एक्सईएन धर्म सुहाग से-
-ऐसे जनरेट होता है प्रोविजनल बिल : बिजली निगम की ओर से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से प्रोविजनल बिल जनरेट किए जाते हैं। यह एक तरह का कच्चा बिल होता है। जिसे तीन बिंदुओं के आधार पर तैयार किया जाता है-
1. पिछले साल इस माह बिजली उपभोक्ता की कितनी खपत रही।
2. अगर खपत पता नहीं चली तो पिछले छह माह में कितनी खपत रही रही, उसका अनुमान।
3. यदि यह भी पता नहीं चल पाती तो उपभोक्ता के कनेक्शन मीटर का कितना लोड है।
-बिल भर दिया तो आगे क्या होगा-
यदि प्रोविजनल बिल भर दिया है तो उसके लिए घबराने की जरूरत नहीं। जितना एमाउंट जमा कराया है, उसका पूरा रिकॉर्ड निगम के पास है। पहली मई से मीटर रीडिंग का काम शुरू हो चुका है। रीडिंग आने के बाद निगम की ओर से एक-एक पैसे का हिसाब किया जाएगा। एक्सईएन ने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि किसी कनेक्शन ने अभी प्रोविजनल बिल के आधार पर 100 यूनिट के पैसे जमा कराएं हैं। तो रीडिंग नोट होने के बाद यदि 80 यूनिट की खपत पाई जाती है तो 20 यूनिट के पैसे रिफंड होंगे और यदि 120 यूनिट खपत निकली तो 20 यूनिट के पैसे देने होंगे।
-जिले में 4.30 लाख बिजली उपभोक्ता
बिजली कनेक्शन : 429772
घरेलू : 306720
कमर्शियल : 43966
शहर में घरेलू : 110336
शहर में कमर्शियल : 22803
केस स्टडी : सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कितना ज्यादा आया बिल-
1. पांच गुणा ज्यादा : प्रेम कॉलोनी क्षेत्र के बिजली कनेक्शन खाता नंबर 8644420000 का 14413.96 रुपये बिजली बिल आया है। 26 मई भुगतान की तिथि है। उपभोक्ता का कहना है कि उनका हर बार औसतन 2500 रुपये बिल आता है। 15 मार्च को भी उन्होंने 2551 रुपये बिल का भुगतान किया है।
2. चार गुणा ज्यादा : प्रेम कॉलोनी क्षेत्र के बिजली कनेक्शन खाता नंबर 8882910000 का 8142.37 रुपये बिजली बिल आया है। जबकि 16 मार्च को उपभोक्ता ने 1701 रुपये बिल भरा है। उपभोक्ता का आरोप है कि उसका हर बार इनता ही बिल आता है। उनकी मीटर रीडिंग 5108 है। जबकि पिछले बिल के समय 4574 थी।
लॉकडाउन 3.0 के पहले दिन बिजली निगम कार्यालय पहुंचे लोगों की समस्याएं जानिए..
35 हजार रुपये बिल ना भरने के कारण डेढ़ साल पहले कनेक्शन कटा था। अब लॉकडाउन से पहले 19 हजार रुपये जमा कराए थे। लेकिन लॉकडाउन होने के कारण कनेक्शन नहीं जुड़ पाया। आज फिर समस्या लेकर आए हैं। -पाला सिंह, कर्ण विहार।
दो लाख 50263 रुपये का राइस मिल का बिजली बिल 21 मार्च को जमा कराया था। 22 को जनता कर्फ्यू होने के बाद रसीद नहीं मिल पाई। अब नए बिल में फिर पिछला बिल जुड़ा आया, चार लाख रुपये का बिल ठीक कराने आए हैं। -अश्विनी, नई अनाज मंडी।
7673 रुपये का बिल आया है। मीटर खराब है। इसके लिए शिकायत भी की है। जबकि पहले 2000 रुपये बिल आता था। घरेलू कनेक्शन है। सीए से भी मिले हैं। आश्वासन दिया है कि रीडिंग जांचने के बाद ठीक होगा। -महेंद्र सचदेवा, सेक्टर-7
बिजली कनेक्शन पर एमसीओ चढ़ाना है। बिना एमसीओ के ही काफी समय से मीटर चल रहा है। ऐसे में रीडिंग न होने के कारण 50 हजार रुपये बिल के रूप में जमा करा चुके हैं। कई बार शिकायत कर चुका हूं। कोई सुनवाई नहीं हुई। -नारायण सिंह, राजीव पुरम।
लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। एवरेज के आधार जो प्रोविजनल बिल बनें हैं। उनका भुगतान, रीडिंग होने के बाद बनने वाले बिल में एडजेस्ट होगा। निगम एक-एक पैसे का हिसाब देगा। किसी को भी बिल ज्यादा होने की स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। मेरी लोगों से अपील है कि बिजली निगम के दफ्तरों में ना जाकर विभाग की वेबसाइट पर या हेल्पलाइन नंबर 1912 पर अपनी कंप्लेंट रजिस्टर करें। -एसके चावला, एसई, बिजली निगम करनाल।