माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। खेतों को काटकर अवैध कॉलोनियां बनाई जा रही हैं। कॉलोनाइजर के ब्रोशर में एक से बढ़कर एक सुविधा का दावा होता है। पक्की सड़क, सीवर लाइन और 24 घंटे पानी की सुविधा। लेकिन ये कागजी दावे हैं और केवल ब्रोशर तक सीमित हैं। इन कॉलोनाइजरों के पास न तो टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (डीटीपी) विभाग की मंजूरी होती है और न ही किसी तरह की वैध अनुमति।
शहर के चारों ओर, खासकर राष्ट्रीय राजमार्ग और मुख्य संपर्क मार्गों के पास, खेतों में अवैध रूप से मकान और प्लॉट काटे जा रहे हैं। विशेष रूप से सेक्टर-16 अंबेडकर भवन के पास, रामदेवी कॉलोनी पार्ट- 2, दून वैली के पास कॉलोनी काटी जा रही हैं। अमर उजाला टीम ने सोमवार को यहां का दौरा किया। करीब 200 एकड़ से ज्यादा जमीन पर अवैध कॉलोनियां कट चुकी हैं।
ठगी के दावे
अवैध कॉलोनी में कॉलोनाइजर सबसे पहले सस्ती दरों पर प्लॉट की पेशकश करते हैं। पहली सेल में खरीदार से महज बयाना लिया जाता है और 11 महीने तक बाकी रकम देने का समय दिया जाता है। खरीदार को रजिस्ट्री कराने का झांसा दिया जाता है। नक्शा भी दिखाया जाता है। पक्की सड़क, सीवर, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं का भरोसा दिया जाता है। डीटीपी की मंजूरी के बिना इन सुविधाओं का होना संभव नहीं है। न तो ऐसी जगहों पर बैंक से लोन मिलता है और न ही यहां पक्की सुविधाएं उपलब्ध हो पाती हैं।
लोगों से अपील है कि सस्ते प्लॉट के लालच में आने से पहले पूरी तरह जांच-पड़ताल करें। वरना आपकी मेहनत की कमाई अवैध कॉलोनियों के जाल में फंस सकती है। विभाग की ओर से अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई जारी रहेगी। -गुंजन वर्मा, डीटीपी, करनाल