संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सड़क हादसे में ट्रक क्षतिग्रस्त होने के मामले में यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कोताही का दोषी पाया है। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को पांच लाख 12 हजार 260 रुपये का बीमा क्लेम नाै प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करे। साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 11 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान करने का भी निर्देश दिया। इन आदेशों का पालन 45 दिनों के भीतर करना होगा।
उपभोक्ता आयोग के फैसले के अनुसार, सेक्टर चार निवासी शिकायतकर्ता संदीप मलिक ने एक ट्रक खरीदा था, उसका बीमा यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी से करवाया था। 6 जनवरी 2022 को इंदौर में हादसे में ट्रक क्षतिग्रस्त हो गया। शिकायतकर्ता ने ट्रक की मरम्मत रिधम मोटर्स से करवाई। मरम्मत के लिए उनसे सात लाख 24 हजार 972 रुपये वसूले गए थे, लेकिन बीमा कंपनी ने दस्तावेजों की कमी का बहाना बनाकर क्लेम फाइल बंद कर दी। अदालत में बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि वाहन का उपयोग व्यवसायिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था। इसके अलावा शिकायतकर्ता ने कैंसिल चेक, बैंक मैंडेट फॉर्म और डिस्चार्ज वाउचर जैसे जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए। इसी कारण बीमा कंपनी ने 25 जून 2022 को क्लेम फाइल बंद कर दी थी।
झूठे आश्वासन दे रहीं बीमा कंपनियां : कोर्ट
दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों ने पाया कि ट्रक शिकायतकर्ता की आजीविका का एकमात्र साधन था, इसलिए इसे व्यावसायिक श्रेणी में रखकर क्लेम नहीं नकारा जा सकता। आयोग ने कहा कि कोई व्यक्ति इतने बड़े क्लेम के लिए मामूली दस्तावेज जमा न करे, यह अविश्वसनीय है। आयोग ने माना कि बीमा कंपनियों में यह चलन बन गया है कि वे पॉलिसी बेचते समय झूठे आश्वासन देती हैं, लेकिन क्लेम के समय बहाने बनाकर क्लेम रिजेक्ट कर देती हैं।
45 दिन के अंदर लागू करना होगा आदेश
हालांकि शिकायतकर्ता ने 7.24 लाख रुपये का दावा किया था, लेकिन आयोग ने सर्वेयर की ओर से निर्धारित पांच लाख 12 हजार 260 रुपये की राशि को सही माना। अदालत ने रिधम मोटर्स के खिलाफ कोई सख्त आदेश नहीं दिया, क्योंकि वह प्रक्रिया के दौरान अनुपस्थित रहे। मुख्य जिम्मेदारी बीमा कंपनी पर तय की गई है और उसे 5.12 लाख रुपये बीमा राशि, वहीं 36 हजार रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। आयोग ने इन आदेशों को 45 दिनों के भीतर लागू करने का समय दिया है।