करनाल में किसानों को 72 घंटे में धान का भुगतान करने के सरकार के दावे झूठे साबित हो रहे है। सैकड़ों किसानों का पांच दिन का करोड़ों रुपये का भुगतान बकाया पड़ा है। भुगतान नहीं होने के कारण किसानों को काली दिवाली मनानी पड़ रही है।
उधर, इस मामले को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रतन मान ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अगले पांच दिन के भीतर बकाया भुगतान नहीं किया तो कड़ा विरोध होगा। सरकार ने किसानों की फसल का भुगतान 72 घंटे में करने का निर्देश जारी किया हुआ है। किसानों को भी इससे राहत मिलती रही है लेकिन करनाल मंडी में धान की आवक जोरों पर है। पिछले 16 से लेकर 21 अक्तूबर तक निरंतर पांच दिन का किसानों का भुगतान नहीं किया गया।
ऐसा होने से किसानों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। किसानों में सरकार के प्रति इस मामले पर नाराजगी है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रतन मान ने कहा कि सरकार सदैव किसानों के साथ कुठाराघात करती आई है। सरकार ने किसान को फायदा पहुंचाने का कोई काम नहीं किया है।
कहने को किसानों को 72 घंटे में भुगतान करने के आदेश हैं लेकिन करनाल मंडी के हाल पर नजर डाली जाए तो करीब पांच करोड़ रुपये का भुगतान बकाया पड़ा है। मान ने चेतावनी देते कहा कि सरकार ने पांच दिनों में भुगतान नहीं किया तो सरकार के खिलाफ संघर्ष का बिगुल बजा दिया जाएगा।
मक्खी के काटने से चार पशुओं की मौत
असंध के गांव रतक में एक विशेष मक्खी का कहर इस कद्र बरपाया हुआ है कि पिछले चार दिन में एक ही पशुबाड़े में दो भैंसों सहित चार दुधारू मवेशियों की मौत हो गई है।
पशुपालक घटना से खौफज़दा हैं, वहीं, पशु चिकित्सा केंद्रों की ओर से सहायता नहीं मिलने से भी उनमें रोष है। किसान पूर्व सरपंच बलदेव सिंह, शीशा सिंह, अरविंदर, सूरत सिंह साही, जोगा सिंह, मालिक सिंह, सुखा सिंह, जसपिंदर सिंह ने बताया कि पूर्व सरपंच बलदेव सिंह के पशुबाड़े में एक मक्खी की वजह से दो भैंसों की मौत हो गई। गांव में पशुपालन विभाग की एक डिस्पेंसरी है, परंतु वहां कोई चिकित्सक नहीं है।
आरोप है कि रात को जब उनकी भैंसों की तबीयत खराब हो गई तो वे असंध में एक सरकारी पशु चिकित्सक के घर आए और तीन घंटे दरवाजा खटखटाने के बावजूद दरवाजा नहीं खुला तो निराश होकर वापस लौट आए। पूरी रात भैंसों ने तड़प-तड़पकर जान दी। उन्होंने इसे सीधे तौर पर चिकित्सकों की लापरवाही बताया। शीशा सिंह ने बताया कि दोनों भैंसें अच्छी नस्ल की थी और इनकी कीमत डेढ़ से दो लाख के बीच थी। पिछले तकरीबन डेढ़ वर्ष की अवधि से उक्त डिस्पेंसरी में कोई भी पशु चिकित्सक नहीं है।
गांव में डेढ़ हजार पशु हैं, जबकि मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव न्यू झींडा में भी एक हजार के करीब पशु हैं। इतने पशु होने के बावजूद यह खेद की बात है कि उनके गांव में कोई पशु चिकित्सक तैनात नहीं है। पशुपालन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार असंध ब्लॉक में 11 पशु चिकित्सकों के पद हैं, परंतु केवल पांच ही उपलब्ध हैं।
वीएलडीए के भी 32 पदों में से केवल 24 कार्यरत हैं। भैंसों की मौत के बाद चिकित्सकों की विशेष टीम ने गांव का दौरा किया और भैंसों की मौत के कारणों के बारे में जानकारियां जुटाई। वरिष्ठ चिकित्सक धर्मपाल ने बताया कि भैंसों की मौत ट्रिमोसिया नामक मक्खी के काटने की वजह से हुई है और इससे आगे बचाव के लिए किसानों को टिप्स दिए जा रहे हैं।
काली दिवाली मनाएंगे पांच गांवों के किसान
घरौंडा में गलत चकबंदी से पीड़ित किसानों ने काली दिवाली मनाने का फैसला किया है। तीन महीने से चल रहे आंदोलन में किसानों ने पहले काला दशहरा मनाया था और प्रशासन की अनदेखी के चलते अब काली दिवाली मनाने का फैसला लिया है।
यह फैसला गांव भरतपुर में आयोजित पांच गांवों की पंचायत में लिया गया। शनिवार को गांव भरतपुर में किसान नेता प्रदीप मराठा व राजबल राणा की अध्यक्षता में महिपाल राणा के निवास स्थान पर एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में पीड़ित किसानों ने प्रशासन के खिलाफ रोष जताया। किसानों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के चलते ग्रामीण अपने त्योहारों को भी नही मना रहे है। पहले दशहरा व अब काली दिवाली मनाने पर उन्हें प्रशासन मजबूर कर रहा है।
रविवार को ज्ञानपुरा कॉलेज के सामने हजारों की संख्या में पांचों गांवों के पीड़ित किसान माथे पर काली पट्यिां बांधकर और हाथों में काले झंडे लेकर काली दिवाली मनाएंगे। उन्होंने प्रशासन को चेताया कि इस बाद भी प्रशासन ने पीड़ित किसानों की समस्या का समाधान नहीं किया तो संत गोपालदास के दिए गए अल्टीमेटम के तहत अपनी ट्रैक्टर ट्रालियों में सवार होकर गांव से पलायन करके दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी निवास स्थान पर धरना देंगे।