- बोले, यात्रियों की संख्या कम होने से नहीं हो रही कमाई, घर चलाना हुआ मुश्किल
भगवान दास
करनाल। शंभू रेलवे स्टेशन पर किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना देकर ट्रेनों का संचालन रोक रखा है, जिसके कारण इसका सीधा असर अंबाला, कुरुक्षेत्र और करनाल रेलवे स्टेशन पर भी पड़ रहा है। यहां यात्रियों के साथ-साथ खाने का सामान बेचने वाले दुकानदारों और ई-रिक्शा व ऑटो चालकों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
जहां एक दिन में हजारों यात्री ट्रेन से सफर करते थे, अब सैकड़ों यात्री ही रेलवे स्टेशन पर पहुंच रहे हैं। जब ट्रेन रद्द होने का पता चलता है तो वो भी वापस चले जाते हैं। ट्रेनें रद्द होने या मार्ग परिवर्तित होने के कारण ऑटो चालकों भी यात्री नहीं मिल पा रहे और उनका धंधा चौपट हो गया है। वहीं स्टेशन में सामान बेचने व आसपास ढाबा चलाने वालों की भी कमाई ठप हो गई है।
खर्चा चलाना मुश्किल
रेलवे स्टेशन के बाहर ऑटो चलाने वाले बलविंद्र सिंह का कहना है कि जहां रोजाना 600 से 700 रुपये तक कमा लेते थे, अब दो दिन से एक भी यात्री नहीं आया जिस कारण खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है। किसानों को सरकार से मांग मनवाने के लिए कोई और रास्ता निकालना चाहिए ताकि आम जन को परेशानी न हो।
किराए में जा रही कमाई
ई-रिक्शा चालक डाल चंद का कहना है कि जब से किसानों ने ट्रेनें रोकी हैं, उनका काम बिल्कुल कम हो गया है, ट्रेनें चलें तो यात्री आएंगे तभी तो कोई ई-रिक्शा में बैठगा। अब जो कमाते हैं वही रिक्शा का किराया दे देते हैं, अब कहां जाएं समझ में नहीं आ रहा। पहले जहां दर्जनों गाड़ियां करनाल स्टेशन पर आती थीं, अब केवल छह से सात आ रही हैं।
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कई दिन से कम बना रहे खाना
रेलवे स्टेशन के बाहर ढाबा चलाने वाले सोनू शर्मा ने बताया कि ट्रेनें बंद होने से उनके ढाबे पर सीधा असर पड़ा है, जहां पतीले भर के सब्जी बनाते थे, अब केवल थोड़ी सी बनाते हैं, वह भी फेंकनी पड़ती है, जब ट्रेनें ही नहीं आ रही तो यात्री कहां से आएंगे। कर्मचारियों को तक वेतन देने में दिक्कत आएगी। करनाल में जहां दर्जनों गाड़ियों का ठहराव था, अब केवल पटियाला एक्सप्रेस, कुरुक्षेत्र मेमू, गीता जयंती, एकता, ऊंचाहार, चंडीगढ़ बांद्रा और हरिद्वार एक्सप्रेस ही आ रही हैं।