करनाल। अस्पताल रोड पर शहीद पुलिसकर्मियों की याद में बनाए गए पाश पुस्तकालय को तोड़ने के लिए प्रशासन की तैयारी जोरों पर है। पुस्तकालय की जगह पर कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज बनाया जाएगा।
दरअसल यहां पर पुलिस लाइन और क्वार्टर थी प्रशासन ने तोड़ दिए हैं। हालांकि पुलिस लाइन को कैथल रोड पर शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन पुस्तकालय के लिए प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की। वहीं, प्रशासन के इस कदम से साहित्यकारों में रोष है और उनका कहा है कि पुस्तकालय शहर की धरोहर है। इसे गिरा कर प्रशासन साहित्यकारों पर आघात कर रहा है। गौरतलब है कि पाश एक मशहूर पंजाबी कवि हैं।
आठ हजार किताबें है लाइब्रेरी में
पाश पुस्तकालय में आठ हजार पुस्तकें रखी थी। प्रशासन ने कहा था कि इन किताबों को रखने के लिए जगह का बंदोबस्त किया जाएगा, लेकिन अभी तक किताबें रखने के लिए कोई जगह नहीं दी गई है। हालांकि किताबों को अलग-अलग जगहों पर शिफ्त कर दिया गया है।
वहीं, लाइब्रेरी को बचाने के सांझ साहित्य मंच के बैनर तले साहित्यकार सांसद डा. अरविंद शर्मा और मुख्यमंत्री तक को पत्र लिख चुके हैं। लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ। उधर, पुस्तकालय में रखी आठ हजार किताबों को तीन जगह शिफ्ट कर दिया गया है। यह किताबें सेक्टर-14 में स्थित पंडित चिरंजी लाल राजकीय पीजी कालेज, राजकीय कन्या कालेज रेलवे रोड और जिला लाइब्रेरी रेलवे रोड में शिफ्ट की गई हैं। शहर के साहित्यकारों ने बताया कि पुस्तकालय के लिए कोई दूसरा स्थान देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक इसके लिए कोई जगह सुनिश्चित नहीं हुी है। अलबत्ता किताबों को ही अब तीन जगह शिफ्ट कर दिया गया है।
मेडिकल कालेज से आपत्ति नहीं, बस पुस्तकालय बना रहे
इस पुस्तकालय का नाम अवतार सिंह पाश के नाम पर रखा गया था। साहित्य समाज का दर्पण है। अगर साहित्य को ही संभाल कर नहीं रखा तो समाज को सच्चाई का कैसे पता चलेगी।
साहित्य समाज को हर समय कुछ न कुछ सिखाता रहता है। यहां पर मेडिकल कालेज का निर्माण हो रहा है इस बात से हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन पाश पुस्तकालय को यहीं पर रहने दिया जाए या फिर इसके लिए कोई दूसरा भवन दिया जाए।
-कृष्ण कुमार निर्माण, साहित्यकार।
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लाइब्रेरी से जुड़ी हैं साहित्यकारों की भावनाओं
यह पुस्तकालय साहित्यकारों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। यह करनाल ही नहीं प्रदेश की धरोहर है। अगर हम अपनी धरोहर को ही मिटा देंगे तो इससे ज्यादा साहित्यकारों के दुर्भाग्य की बात क्या होगी। इससे करनाल या आसपास के साहित्यकार ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के साहित्यकार जुड़े हैं।
-अशोक भाटिया, साहित्यकार
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साहित्यिक धरोहर है पाश पुस्तकालय
इस तरह के पुस्तकालय विरले ही कहीं पर मिलते हैं। पुस्तकालय को तोड़ा न जाए, बल्कि इसका ओर ज्यादा विस्तार किया जाए, ताकि हम अपने साहित्य से दूर न हो सकें। यहां पर कल्पना चावला मेडिकल कालेज बनने जा रहा है। ये अच्छी बात है, लेकिन इससे बुरी बात यह है कि करनाल की धरोहर को गिराया जा रहा है। यह साहित्यकारों के साथ नाइंसाफी है।
-अंजू शर्मा, साहित्यकार।
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साहित्य को प्रोत्साहन देने की जरूरत
पुस्तकालय को खत्म करने के बजाय इसका ओर ज्यादा विस्तार किया जाए। मेडिकल कालेज में भी तो पुस्तकें रखी जाएंगी। अगर इन पुस्तकों को भी साथ में रखा जाए तो स्टूडेंट्स का साहित्य के साथ जुड़ाव बना रहेगा। पाश पुस्तकालय को यहीं रहने दिया जाए।
-पीडी कपूर, साहित्यकार।