पानीपत। स्वास्थ्य विभाग एनिमिया मुक्त अभियान में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अभियान के शुरुआती तीन दिन में ही विभाग अब तक 10931 बच्चों, किशोरियों, महिलाओं व पुरुषों में रक्त की जांच कर चुका है। फरीदाबाद के बाद पानीपत जांच करने में दूसरे स्थान पर है। फरीदाबाद स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 15 हजार लोगों की जांच की है। पानीपत स्वास्थ्य विभाग ने अब तक छह माह से पांच साल तक के 1342, पांच साल से आठ साल तक के 965, 10 से 19 साल तक 1353 बच्चों व किशोरों और 867 गर्भवतियों की जांच की है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले की 60 प्रतिशत गर्भवतियों में खून की कमी है। 20 प्रतिशत गर्भवतियों में तो आठ ग्राम से भी कम खून है। वहीं 45 प्रतिशत बच्चों में भी खून की कमी है। 25 प्रतिशत से अधिक बच्चे गंभीर एनिमिक की श्रेणी में आते हैं। इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक माह का एनीमिया मुक्त अभियान शुरू किया है। यह अभियान चार अप्रैल तक चलेगा। इसमें लगभग 50 हजार गर्भवतियों, बुजुर्गों, बच्चों व नौ जवानों की जांच की जाएगी। रक्त की कमी मिलने पर प्राथमिक स्तर पर आयरन की दवा दी जा रही है। वहीं अब गंभीर एनीमिया रोगियों को दवाएं देने के साथ जब तक ये ठीक नहीं होते तब इनकी मॉनिटरिंग कर फीडबैक भी लिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग का फोकस ईंट भट्ठों व फैक्टरियों में रहने वाले प्रवासियों पर है। मॉनिटरिंग के लिए आशा वर्कर को इस अभियान से जोड़ा गया है। अभियान पूरा हाेने के बाद रिपाेर्ट मुख्यालय में साैंपी जाएगी।
रक्त की कमी के लक्षण-
-नींद नहीं आना, आंख की रोशनी कम होना।
-थकान महसूस होना, काम में मन नहीं लगना।
-त्वचा, जीभ और आंखों में में पीलापन।
-होंठ व नाखूनों का रंग भी बदलना।
-दिल की धड़कन असामान्य होना।
-सिरदर्द, श्वास लेने में दिक्कत।
-चेहरे और पैरों पर सूजन।
आयु के हिसाब से सिरप-गोली
- शून्य से पांच वर्ष के बच्चों के लिए-आयरन सिरप
- छह से नौ वर्ष-गुलाबी गोली
- 10 से 19 वर्ष के किशोरों व युवाओं के लिए-नीली गोली
- गर्भवती-स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए-लाल गोली
वर्जन-
डिप्टी सिविल सर्जन डाॅ. शशि गर्ग ने बताया कि एनीमिया मुक्त अभियान के दौरान झुग्गियों, फैक्टरियों व ईंट भट्ठों पर रहने वालों पर स्वास्थ्य विभाग का फोकस है। यहां विशेष रूप से अभियान चलाया जा रहा है। सामान्य, मध्यम व गंभीर एनीमिया के रोगियों के वर्ग बनाए गए हैं। पानीपत में एनीमिया बड़ी चुनौती है। हर महीने हाेने वाली गर्भवतियाें की जांच में भी 60 फीसदी गर्भवतियों में खून की कमी मिलती है। पानीपत में इससे पहले ये अभियान सात दिनाें के लिए हर तीन महीने के बाद तक चलता था। कुछ दिन पहले 100 दिनाें तक भी एनिमिया मुक्त अभियान चला है। अब यह मासिक अभियान जिले की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर चलाया जा रहा है।