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Karnal News: डायरी के पन्नों से खुलेंगी रिश्वत की परतें

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ग्रुप में डाला जाता था बैठक का मैसेज, एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम के हाथ लगी डायरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। डिपो होल्डर से रिश्वत लेने के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम के हाथ आरोपियों की एक डायरी लगी है। जिससे रिश्वत की परतें खुलेंगी। बताया जा रहा है कि उस डायरी में आरोपियों के राज हैं। उन्होंने किस-किस डिपो होल्डर से कितनी कितनी रिश्वत ली है। आरोपी उस डायरी में ही रिश्वत का पूरा लेखा जोखा लिखते थे, किस डिपो होल्डर से रिश्वत के रुपये आ गए हैं और कौन रह गया है। इसके बाद जो डिपो होल्डर रह जाता था। उसे कॉल कर मीटिंग के लिए बुलाया जाता था।
इतना ही नहीं डिपो होल्डर के ग्रुप में भी बैठक का मैसेज डाला जाता था। उस मैसेज से डिपो होल्डरों को पता चल जाता था कि रिश्वत के रुपये लेकर कुंजपुरा कार्यालय में जाना है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह लंबे समय से चल रहा था। करीब 14 डिपो होल्डर सामने भी आ चुके हैं, जिन्होंने बताया कि उनसे भी आरोपियों ने रिश्वत ली है। सभी डिपो होल्डर से रिश्वत की राशि भी अलग-अलग होती थी। एसीबी निरीक्षक दीपक ने बताया कि फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।
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मोबाइल से भी खुल रहे राज
रिश्वत के मामले में पकड़े गए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एएफएसओ राजेंद्र सिंह व निरीक्षक नीरज वधवा के मोबाइल से भी कई राज खुल रहे हैं। बताया जा रहा है कि टीम को कुछ रिकॉर्डिंग भी मिली है। जिसमें रिश्वत के रुपये को लेकर दोनों आरोपी बात करते सुनाई दे रहे हैं। इससे अलग टीम द्वारा दी गई दबिश में भी कई सबूत टीम ने जुटाए है तो वहीं वीडियो रिकॉर्डिंग भी की है। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को एसबी की टीम ने पकड़ा है। फिलहाल ये आरोपी जेल में हैं। बताया जा रहा है कि टीम आरोपियों की संपत्ति की भी जांच कर रही है ताकि खुलासा हो सके कि रिश्वत के रुपये से आरोपियों ने क्या-क्या खरीदारी की है। पकड़े गए तीनों आरोपियों से टीम ने 82 हजार रुपये बरामद किए हैं।
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दो तरीके से लेते थे आरोपी रिश्वत
कुंजपुरा क्षेत्र में 31 राशन डिपो हैं। शिकायतकर्ता खराजपुर निवासी विकास के अनुसार आरोपी खाद्य एवं आपूर्ति निरीक्षक डिपो होल्डरों से दो तरीके से रिश्वत लेता था और अपने अधिकारी एएफएसओ राजेंद्र को भी देता था। पहली रिश्वत उन रुपयों में से ली जाती थी। जो राशन डिपो का कमीशन आता था। विभाग की ओर से उन्हें 200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से कमीशन मिलता है। यह कमीशन छह से सात महीने की एक साथ आती है। इसलिए आरोपी उस कमीशन में से पहले पांच प्रतिशत रिश्वत मांगते थे। जब डिपो होल्डरों ने कहा कि इतने रुपये नहीं देंगे तो आरोपियों ने तीन से चार प्रतिशत कमीशन लेना शुरू कर दिया। इससे अलग दूसरी रिश्वत हर महीने बंटने वाले राशन में 20 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से लेते थे। यदि डिपो होल्डर रिश्वत न दे तो उसकी आपूर्ति निलंबित करने की धमकी दी जाती थी। जो निरीक्षक के हाथ में होती है।
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