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करनाल मंडी से किसानों को लौटाया, भाकियू का आंदोलन का ऐलान

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धान की दोबारा शुरू हुई खरीद किसानों के गले नहीं उतरी है। शनिवार को जिले की मंडियों में ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने वाले किसानों की फसल खरीदी गई। घरौंडा और इंद्री में 65 हजार क्विंटल धान की खरीद की गई। इसके अलावा करनाल की मंडी में पीआर धान लेकर पहुंचे किसानों की ट्रालियों को बाहर से ही लौटा दिया गया। अधिकारियों का कहना था कि मंडी में पड़ी धान को खरीदा जाएगा। गेट के बाहर से लौटाने के कारण किसानों ने नाराजगी जाहिर की। दूसरी तरफ भारतीय किसान यूनियन ने सरकार की इस कार्यशैली के विरोध में आंदोलन को एलान किया है। यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार सभी किसानों की धान खरीदे नहीं तो सोमवार को वह करनाल अनाज मंडी में सरकार के खिलाफ जमकर रोष प्रदर्शन करेंगे।
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करनाल अनाज मंडी में सुबह नगर निगम आयुक्त निशांत यादव पहुंचे और उन्होंने अनाज मंडी के तीनों गेटों पर नगर निगम के कर्मचारियों और होमगार्ड के जवानों को तैनात कर दिया। उन्हें निर्देश दिये कि जो भी किसान पीआर धान लेकर अनाज मंडी में आये तो उसे वापस भेज दो। इसी प्रकार 50 से ज्यादा ट्रालियों को कर्मचारियों ने वापस भेज दिया।
किसान बोले-अब इस धान को लेकर हम कहा जाएं
गेट नंबर एक पर जब किसान माया राम पीआर धान लेकर पहुंचे तो कर्मचारियों ने उसे रोक लिया और कहा कि उसे वापस ले जाओ, नहीं तो वाहनों को जब्त कर लिया जाएगा। ऐसे में किसान बोला कि अब इस धान को लेकर कहा जाऊं। इसे कहां बेचूं। सरकार ने यह कैसी खरीद शुरू की है सरकार ने। इसके बाद किसान ने इसकी जानकारी मोबाइल द्वारा अपने जानकारों को दी।
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सरकार किसानों के साथ मजाक कर रही है : सतपाल
उचा समाना गांव निवासी सतपाल ने बताया कि वह अनाज मंडी में पीआर धान की ट्राली लेकर आया था। धर्म कांटे पर ही वापस भेज दिया। ऐसे में सरकार किसानों के साथ मजाक कर रही है। हम धान को कहां लेकर जाएं।
घरौंडा में बिना रजिस्ट्रेशन वाले किसानों की धान औने-पौने दामों में खरीदी
नई अनाज मंडी में लगभग एक सप्ताह के बाद किसानों की धान खरीद का काम शुरू किया गया। सरकारी एजेंसियों ने केवल मेरी फसल-मेरा ब्योरा पर रजिस्टर्ड किसानों की ही धान खरीदी। पहले दिन लगभग 570 किसानों की लगभग 40 हजार क्ंिवटल धान खरीदी गई। जिन किसानों का रजिस्ट्रेशन नहीं था, उन किसानों को अपनी फसल औने-पौने भाव में बेचना पड़ा। इससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
मार्केट कमेटी के अधिकारियों ने 26 अक्तूबर से किसानों को गेट पास देने बंद कर दिए थे। जिसके चलते सरकारी एजेंसी धान नहीं खरीद रही थी। धान की खरीद न होने से किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने किसानों का एक-एक दाना खरीदने का दावा किया था। इसके चलते शनिवार को सरकारी एजेंसियों ने धान की खरीद शुरू की। सरकारी एजेंसियों ने केवल पोर्टल में रजिस्टर्ड किसानों की धान खरीदी। दूसरे किसानों को अपनी धान बेचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। किसानों को कहना है कि इस बर्ष धान का खरीददार नहीं है। जिससे फसल को कम दामों में बेचना पड़ रहा है। वहीं सरकारी आंकड़ों के अनुसार शनिवार को फूड एंड सप्लाई, हैफेड व वेयर हाउस ने करीब पांच सौ सत्तर किसानों की पैंतालीस हजार क्विंटल धान की खरीद की।
लगभग एक घंटे तक हुआ मंथन
धान की खरीद होने की सूचना मिलने के बाद मंडी प्रधान सुशील गर्ग, राइस मिल एसोसिएशन के प्रधान जयकिशन गोयल व अन्य व्यापारी मार्केट कमेटी कार्यालय में पहुंचे और चेयरमैन रमेश बैरागी, बीडीपीओ प्रेम सिंह, मार्केट कमेटी के सचिव चंद्र प्रकाश, सरकारी एजेंसी के अधिकारी राजेश कुमार, सुरेंद्र सिंह से मिले और मंडी में कई दिनों से पड़ी धान खरीदने की बात कही। अधिकारियों का कहना था कि वे केवल रजिस्ट्रेशन करवाने वाले किसानों की ही धान खरीदेंगे।
सरकार के निर्देशों के अनुसार मेरी फसल-मेरा ब्योरा पर रजिस्ट्रशन करवाने वाले किसानों की धान खरीदी जाएगी। शनिवार को पांच सौ सत्तर किसानों की 45 हजार क्ंिवटल धान खरीदी। लगभग पांच हजार किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन करवा रखा है। जैसे सरकार के निर्देश होंगे, उनकी पालना की जाएगी। - चंद्रप्रकाश, सचिव मार्केट कमेटी घरौंडा
मेरी फसल मेरा ब्योरा वाले किसानों की खरीदी धान
इंद्री। इंद्री अनाज मंडी में दोपहर बाद धान की खरीद की गई लेकिन एजेंसियों ने उन्हीं किसानों की खरीद की जिनका मेरी फसल मेरा ब्योरा पर रजिस्ट्रेशन था। अन्य किसानों की फसल खरीदी नहीं गई। किसानों को मजबूरन ही औने पौने दामों में देनी पड़ी। वहीं अधिकारियों का कहना है कि रविवार को खरीद होगी या नहीं इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। डीएफएससी द्वारा करीब 25 हजार क्विंटल धान की खरीद की गई।
भाकियू ने बजाया बिगुल, चार को अनाज मंडी में प्रदर्शन
करनाल। किसानों की धान खरीद करवाने में प्रदेश सरकार के नाकाम रहने पर धान खरीद का मामला तूल पकड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने कहा कि धान खरीद के मामले में भाजपा सरकार असफल हो रही है। जिसके खिलाफ भाकियू ने आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। सरकार व भाकियू के बीच खींचतान के चलते दोनों के बीच टकराव होंने की नौबत आ सकती है। क्योंकि धान खरीद न होंने तथा बारीक धान की गत सालों की तूलना में कम दाम मिलने से किसान समुदाय में भारी रोष पनपने लगा है। शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष रतनमान की अगुवाई में भाकियू प्रतिनिधि मंडल ने करनाल अनाज मंडी में धान खरीद का जायजा लेने के बाद मार्केट कमेटी के सचिव से भेंट करके धान की समुचित खरीद शुरू करवाएं जाने की बात की। बातचीत में पता चला कि सरकार मात्र उन किसानों के धान की खरीद करेगी जिनका मेरी फसल मेरा ब्योरा के तहत पंजीकरण हुआ है। बाकी किसी किसान के पीआर धान की खरीद नहीं की जाएगी। भाकियू प्रतिनिधिमंडल ने मार्केट कमेटी के सचिव सुंदर कांबोज सिंह को साफ शब्दों में 4 नवंबर से आरपार का आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दे डाली। इस आंदोलन की शुरूआत सीएम सिटी करनाल से की जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री धान खरीद करने की झूठी घोषणा करके किसानों को गुमराह कर रहे है। जाहिर है कि सीएम मनोहर लाल व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला अनाज मंडियों की ओर रूख करने का साहस नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि किसानों को निजी व्यापारियों व खरीददारों के लुटवाने के लिए हवाले कर दिया है। इस अवसर पर प्रदेश संगठन सचिव श्याम सिंह मान, जिला संरक्षक मेहताब कादियान, जिलाध्यक्ष यशपाल राणा, जिला प्रवक्ता सुरेंद्र सांगवान, युवा किसान नेता देवेंद्र सागवान, जसमेर बैनीवाल, वेद सांगवान शेखुपुरा मौजूद थे।
41 साल के किसान आंदोलन के दौरान कभी ऐसा नहीं हुआ
प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने कहा कि भाकियू के 41 सालों के चले किसान आंदोलन के दौरान कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि मंडियों में अपनी उपज बेचने आए किसानों को मंडी के गेट से ही पुलिस बल द्वारा खदेड़ा गया हो। चाहे किसी भी दल की सरकार रही हो। जैसा अबकी बार देखने को मिल रहा है। जब किसानों को मंडियों में घुसने नहीं दिया जा रहा है। किसान के शोषण के साथ साथ प्रदेश की सरकार किसानों को अपमानित कर रही है। मान ने कहा कि पुलिस का कार्य कानून व्यवस्था को संभालना होता है न की किसानों को मंडियों में घुसने न देना।
बेखौफ होकर मंडियों में धान लेकर आए किसान
उन्होंने किसानों से कहा कि सोमवार 12 बजे से किसान बिना डरे करनाल मंडी में धान लेकर आएं। सरकार को हरहाल में धान को खरीदना पड़ेगा। इसके लिए सोमवार से सरकार की तानाशाही के खिलाफ अनाज मंडी करनाल से आंदोलन शुरू किया जा रहा है।
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