जिला प्रशासन ने हरियाणा की सीमा में उत्तर प्रदेश समेत किसी भी अन्य राज्य का गेहूं खरीदने पर रोक लगा दी है। वीरवार को उन किसानों का गेहूं भी राज्य की सीमा पर रोक दिया गया है, दो किसान तो हरियाणा के ही हैं लेकिन उनकी जमीन उत्तर प्रदेश में होने के कारण वहां कटाई के बाद वह गेहूं लेकर हरियाणा के करनाल जिले में आ रहे थे। जिससे उन किसानों के सामने दिक्कत आ गई है। कई किसान बार्डर पर गेहूं लेकर खड़े हैं, जिन्हें प्रवेश नहीं मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश में गेहूं कटाई के साथ-साथ गेहूं की खरीद भी शुरू हो चुकी है। कई किसान गेहूं लेकर हरियाणा की सीमा में भी आने लगे हैं, हालांकि हरियाणा में गेहूं की खरीद 20 अप्रैल से शुरू होगी। लेकिन ऐसे कई किसान हैं, जो रहते तो हरियाणा में हैं, लेकिन उनकी जमीन उत्तर प्रदेश में है। यमुना के कटान के कारण करनाल जिले के भी शेरगढ़ आदि करीब आधा दर्जन से अधिक गांवों के कई किसानों की जमीन उत्तर प्रदेश की सीमा में चली गई। ऐसे किसानों को जिला प्रशासन करनाल ने उत्तर प्रदेश जाकर गेहूं कटाई करने की इजाजत तो दे दी थी लेकिन वीरवार को कई किसान गहाई के बाद वाहनों में अपना गेहूं भरकर हरियाणा में प्रवेश कर रह रहे थे तो उन्हें सीमा पर ही रोक दिया गया। क्योंकि करनाल के उपायुक्त निशांत कुमार यादव का आदेश है कि करनाल जिले में किसी दूसरे राज्य का गेहूं नहीं खरीदा जाएगा। इस बारे में डीसी निशांत कुमार यादव ने कहा कि पहले करनाल (हरियाणा राज्य) के किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा। जो किसान हरियाणा राज्य के हैं और उनकी जमीन उत्तर प्रदेश या किसी अन्य राज्य में हैं पहले उनका चिन्हांकन कराकर सूचीबद्ध किया जाएगा। उसके बाद उन किसानों को एक तिथि बताई जाएगी, उसी तिथि पर ऐसे किसानों को अपना गेहूं हरियाणा राज्य की सीमा पर लाकर बेचने की इजाजत दी जा सकेगी।
मनरेगा मजदूरों को मिल सकती है काम करने की छूट
-उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने जिले के लोगों को राहतभरी खबर देते कहा है कि यदि कोरोना संक्रमण नहीं बढ़ा और स्थिति संतोषजनक रही तो ग्रामीण इलाकों में 20 अप्रैल के बाद कुछ इंडस्ट्रीज को चलाने की अनुमति दी जा सकती है। जिससे वहां पर सोशल डिस्टेंटिंग के साथ काम शुरू कराया जा सकेगा।
सामाजिक संस्थाओं को मिल सकती है खाद्यान्न वितरण की इजाजत
-लॉकडाउन में पिछले दिनों से सामाजिक संस्थाओं द्वारा भी गरीबों को खाद्यान्न आदि बांटने पर रोक लगा दी गई थी, क्योंकि अक्सर ऐसा देखा जा रहा था कि खाद्यान्न वितरण के दौरान सोशल डिस्टेसिंग की चेन टूट रही थी। लेकिन कोरोना केसों की स्थिति संतोषजनक रही तो 20 अप्रैल के बाद सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से अनुपालन करने की हिदायत के साथ सामाजिक संस्थाओं को खाद्यान्न वितरण की इजाजत दी जा सकती है लेकिन उन्हें क्षेत्र आवंटित किया जाएगा। कोई भी संस्था अपनी मर्जी से कहीं भी खाद्यान्न वितरण नहीं कर सकेगी।