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सफाई और यातायात व्यवस्था सुधरे तभी बनेंगे हम स्मार्ट

Tue, 31 May 2016 12:04 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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स्मार्ट सिटी काो लेकर बैठक - फोटो : अमर उजाला
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स्मार्ट सिटी फेज टू की परीक्षा की तैयारियों में जुटे नगर निगम की ओर से स्मार्ट सिटी पर सीनियर सिटीजन की राय जानने के लिए सोमवार को करनाल क्लब में सीनियर सिटीजन की बैठक आयोजन किया गया। इसमें शहर की सफाई व्यवस्था से लेकर ट्रैफिक, शिक्षा, हरियाली, कृषि, ट्रांसपोर्ट, रोजगार और उद्योगों तक हर विषय पर गहनता से विचार विमर्श हुआ। शहर में सफाई व ट्रैफिक व्यवस्था की बदहाली पर सीनियर सिटीजन जमकर बरसे। सभी ने एक सुर में कहा कि शहर में सफाई और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार हो तभी शहर स्मार्ट बनेगा। सीनियर सिटीजन बोले स्मार्ट सिटी में शहर का नाम आने के एक साल बाद भी अभी सिर्फ प्लानिंग हुई है, विकास कार्य नहीं हुए हैं। ऐसे में कर्ण नगरी को स्मार्ट देखने के लिए तो दोबारा जन्म लेकर आना पड़ेगा।  
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बैठक में मेयर रेनूबाला गुप्ता और निगम आयुक्त सुमेधा कटारिया ने स्मार्ट सिटी फेज टू को लेकर चल रही निगम की तैयारियों पर सीनियर सिटीजन को विस्तारपूर्वक जानकारी दी। निगम आयुक्त कटारिया ने कहा कि स्मार्ट सिटी की परीक्षा पास करने के लिए निगम को विकास कार्यों के साथ शहर की जनता की भागेदारी भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक शहर की जनता निगम का सहयोग नहीं करेगी तब तक शहर का स्मार्ट होना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि निगम लोगों को जागरूक करने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाएगा। बैठक में अतिक्रमण व शहर का नाम दानवीर कर्ण के नाम पर रखने को लेकर अच्छी बहस हुई।

सीनियर सिटीजन बोले कर्ण नगरी में रहने के बाद भी आज तक लोगों को कर्ण की महानता का व उनके विचारों का पता नहीं है। प्रशासन को कर्ण की प्रतिमा लगाकर समाज में कर्ण की विचारधारा का प्रचार करने का प्रयास करना चाहिए। इसके अलावा बुजुर्गों ने अपने पुराने अनुभव साझा कर शहर की पुरानी तस्वीर व समस्याओं को अपने शब्दों में ब्यान किया तथा उन समस्याओं के स्थायी समाधान पर अपनी राय दी।
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बैठक में आए प्रमुख सुझाव
- शहर में सफाई व्यवस्था और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।
- स्मार्ट सिटी में युवाओं के लिए रोजगार के अधिक से अधिक अवसर सृजित हों।
- शहर में ग्रीनरी का बढ़ावा देने के लिए खाली पड़ी जगहों पर फॉरेस्टी लगाई जाए।
- शहर में युवाओं के लिए उच्च शिक्षा की व्यवस्था की जाए, इसके लिए जिले में एक विश्वविद्यालय की स्थापना हो। इसके अलावा शहर के छोटे स्कूल व कॉलेजों को अपग्रेड किया जाए।
- मुगल कैनाल के दोनों तरफ मार्केट बनाने की बजाए एक तरफ मार्केट व दूसरे तरफ पार्किंग का निर्माण किया जाए।
- जीटी रोड पर बुजुर्गों के लिए रेन शेल्टर बनाए जाएं, ताकि लोगों को बरसात के समय कोई परेशानी न हो।
- स्मार्ट सिटी के लिए लोगों की सोच को स्मार्ट बनाना जरूरी है, इसके लिए अधिक से अधिक जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाए।
-शहर में विभिन्न चौक चौराहों पर लगी महापुरुषों की मूर्तियों की रोज सफाई होनी चाहिए।
- शहर में पानी की निकासी के साथ, बरसाती पानी के संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करना जरूरी।
- ग्रीन ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देना जरूरी है।

स्मार्ट सिटी पर सीनियर सिटीजन की राय
शहर को स्मार्ट बनाने के लिए सबसे पहले लोगों को स्मार्ट बनाने की जरूरत है। इसके लिए सामाजिक संस्थाओं और स्कूलों के सहयोग से निरंतर जागरूकता कार्यक्रम चलाने की जरूरत है। यदि कहीं पर प्रशासन को सख्ती भी बरतनी पड़े तो इसमें कोई गुरेज नहीं करना चाहिए। जब तक लोगों की सोच नहीं बदलेगी, तब तक शहर तस्वीर भी नहीं बदलेगी।
डा. एसके शर्मा, पूर्व निदेशक स्वास्थ्य विभाग।
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स्मार्ट सिटी के लिए विकास कार्यों में स्मार्ट तकनीक का प्रयोग करने की जरूरत है, लेकिन अब जिस तरीके से शहर में विकास कार्य हो रहें, इन तरीकों से शहर के स्मार्ट होने की उम्मीद नहीं है। शहर की ज्यादातर कॉलोनियों में बिना प्लानिंग के कार्य होते हैं। पहले निगम सड़क बना देता है, फिर जनस्वास्थ्य विभाग व मोबाइल कंपनियां पाइप लाइनों के नाम पर उखाड़ देती हैं। इससे करोड़ रुपये बर्बाद होने के बाद हालात जस के तस बने हुए हैं।
अंजू शर्मा, वूमेन काउंसलर इन पुलिस करनाल।
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शहर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार जरूरी है। सबसे पहले तो प्रशासन को शहर में वन वे ट्रैफिक सिस्टम, सड़कों से अतिक्रमण हटाने व शहर में सिटी बस सर्विस शुरू करने की जरूरत है। जब तक शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, तब तक शहर के स्मार्ट सिटी बनने का सपना पूरा होना संभव नहीं है।
डा. पीसी गुप्ता, पूर्व निदेशक हॉर्टिकल्चर हरियाणा।
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केवल सड़कों और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार करने से शहर स्मार्ट नहीं बनेगा। इसके साथ समाज को शिक्षित करने व युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसरों का सृजन करना भी जरूरी है। यह सार्वभौमिक सत्य है, जब तक इंसान का पेट न भरा हो तब तक वह विकास के बारे में नहीं सोचता। जब इंसान आर्थिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ होगा तभी वह अपने आस पास के अन्य लोगों व समाज के बारे में सोचता है। इसलिए जिले को शिक्षा हब के रूप में विकसित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
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मंजू शर्मा, रिटायर्ड स्कूल प्रिंसिपल।
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