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Karnal News: पोषक तत्वों से भरपूर किस्में विकसित कर किसानों को देनी होगी

Fri, 17 Oct 2025 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के क्षेत्रीय स्टेशन करनाल में वीरवार को अनुसूचित जाति उप योजना के तहत कृषक प्रशिक्षण बीज वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें वैज्ञानिकों ने कहा कि पोषक तत्वों से भरपूर किस्में विकसित करके किसानों को देनी होगी जिससे कुपोषण की समस्या खत्म होगी।
जिसमें करीब 500 किसानों को नई किस्मों के बीच सहित जैविक खाद व स्प्रे मशीन का वितरण किया गया। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के संयुक्त निदेशक (विस्तार) डॉ. रवींद्रनाथ पडारिया ने कहा कि देश को दलहन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा। वैज्ञानिकों को नई जलवायु, कम पानी में होने वाली, उच्च गुणवत्ता व अधिक पैदावार वाली किस्मों व तकनीकियों को विकसित करना होगा।
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डॉ..रवींद्रनाथ पडारिया के आरएआरआई, क्षेत्रीय स्टेशन के अधीक्षक डॉ. शिव कुमार यादव व अन्य वैज्ञानिकों ने स्वागत किया। मुख्य अतिथि ने अनुसूचित जाति के किसानों को निशुल्क किट वितरण की शुरुआत की, इस किट में सरसों का पूसा बोल्ड दो किलो बीज, गेहूं का एचडी 2967 या एचडी 3086 का 40 किग्रा बीज, 50 किग्रा वर्मी कंपोस्ट, 10 किलो जिंक सल्फेट व पांच किसानों के ग्रुप को एक स्प्रे पंप शामिल रहा। सभी 500 किसानों को एक एक निशुल्क किट प्रदान की गई। इस मौके मुख्य अतिथि ने कहा कि प्रधानमंत्री धनधान्य कृषि योजना व दलहन अभियान की शुरुआत कर दी है, हमें दलहन में भी देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मिलकर कार्य करना होगा। देश में भुखमरी तो नहीं कहेंगे लेकिन ऐसे लोग अच्छी खासी संख्या में हैं, जो भोजन तो करते हैं लेकिन पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है, ऐसे में वैज्ञानिकों को अधिक पोषक तत्वों से भरपूर किस्मों को विकसित करके किसानों को देनी होगी। जिससे बीमारियों में लगने वाला कमाई का एक बड़ा हिस्सा बच सके। जमीन जल को बचाने के लिए समावेशी खेती को अपनाना होगा। कीटनाशकों, रसायनिक खादों का प्रयोग कम करना होगा।
स्टेशन अधीक्षक शिव कुमार यादव ने कहा कि क्षेत्रीय स्टेशन बनने के बाद हरित क्रांति के दौरान जो बीज लाए गए, उनका विस्तार करके आज उत्तम गुणवत्ता वाले बीज तैयार करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत किसानों को नई किस्मों के बीज व अन्य वस्तुएं दी गई है, इससे ये किसान अपनी आमदनी को बढ़ा सकेंगे।
श्रेष्ठ कार्य करने वालों का सम्मान
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संगीता यादव के संचालन में श्रेष्ठ कार्य करने वालों को सम्मान दिया गया। इस मौके पर वैज्ञानिक श्रेणी केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ.अश्वनी महाजन को उत्कृष्ट कार्य के लिए अवॉर्ड दिया गया। तकनीकी श्रेणी में राजेश मीणा व सुनील कुमार को, प्रशासनिक श्रेणी में सहायक प्रशासनिक अधिकारी विकास सनवाल व सहायक निर्मला कुमारी, परियोजना में यंग प्रोफेशनल श्रेणी में इंजीनियर सचिन यादव व अनिल कुमार, एमटीएस में सुनील कुमार व हुकम चंद, दैनिक भोगी कर्मचारी श्रेणी में सुरेश कुमार बलड़ी व रोशन को अवॉर्ड देकर सम्मानित किया गया। प्रधान वैज्ञानिक डॉ.राकेश सेठ ने आभार व्यक्त किया।
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वैज्ञानिक जलवायुसहनशील के साथ पोषण बढ़ाने वाली किस्में विकसित करें
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के संयुक्त निदेशक (विस्तार) डॉ.रवींद्रनाथ पडारिया ने कहा कि वैज्ञानिकों को पोषण सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा, ऐसी किस्में विकसित करनी होगी, जो जलवायुसहनशील, कम पानी में पैदावार होने वाली, अधिक आयरन जिंक वाली बायोफोर्टिफाइड किस्में बनानी होगी, जिससे भोजन से ही लोगों को संपूर्ण आवश्यक पोषक तत्व मिलें, वह बीमार न हों। किसानों को समेकित खेती ओर ध्यान देकर फसल विविधीकरण करना होगा, फसलों के साथ पशुपालन, बागवानी भी करनी चाहिए।
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