माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शहर की 12 से अधिक निजी लाइसेंसी कॉलोनियों के हजारों बाशिंदों को राहत मिलेगी, क्योंकि अब नगर निगम उनकी कॉलोनियों में जाकर भी हर रोज घरों से सूखा कूड़ा एकत्रित करेगा। हालांकि गीले कचरे और सड़कों आदि की स्वच्छता की जिम्मेदारी कॉलोनाइजरों की ही रहेगी। इसकी योजना तैयार की जा रही है, इसके लिए टिपरों व कर्मचारियों की संख्या को भी बढ़ाया जाएगा। दूसरी ओर निगमायुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने स्वच्छता शाखा व नगरपालिका सचिवों के साथ बैठक करके निर्देश दिए कि निगम व नगर पालिका क्षेत्रों में बल्क वेस्ट जेनरेटर (बीडब्ल्यूजी) चालू हालत में होने चाहिए, यदि वह नियमों के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे, तो उन पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दें।
शहर में अल्फा सिटी, सीएचडी सिटी, अंसल, पार्श्वनाथ, स्मार्ट होम, जेबीबी, रॉस, नरसी विलेज, न्यू वर्ल्ड रेजीडेंसी, संतूर व गोल्फ लिंक जैसी कई लाइसेंसी कॉलोनियां हैं, इनकी स्वच्छता व्यवस्था भी कॉलोनाइजर के ही हवाले हैं, यहां डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की सुविधा नहीं है। ऐसे में अब इन लाइसेंसी कॉलोनियों में भी घरों से सूखा कचरा उठाने की योजना नगर निगम तैयार कर रहा है, इसके निर्देश मंगलवार को निगमायुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने जिले की नगर पालिकाओं के सचिवों व स्वच्छता शाखा के अधिकारियों के साथ बैठक में दिए। इसमें जोन इंचार्ज को निर्देश दिए कि उनके क्षेत्र में जितने भी अस्पताल हैं, उनके बायो मेडिकल वेस्ट को कौन सी एजेंसी एकत्र कर रही है और उसका निस्तारण कहां किया जा रहा है, इस पर निगरानी रखी जाए।
कम से कम 50 मासिक चालान के निर्देश
निगमायुक्त ने जोन इंचार्ज को निर्देशित किया कि नो वेंडिंग जोन में कोई भी रेहड़ी-फड़ी नहीं लगनी चाहिए। इस कार्य में जोन इंचार्ज ढील न भरतें, अन्यथा कार्रवाई होगी। शहर में महाराजा अग्रसेन चौक से श्रीमद्भगवद् गीता द्वार तक, आंबेडकर चौक से लोक निर्माण विश्राम गृह, पुराने कमेटी चैक से रणबीर हुड्डा चौक (कर्ण कैनाल पुलिया), आईटीआई चौक से सेक्टर-9 पुलिया तथा महाराणा प्रताप चौक से ताऊ देवी लाल चौक तक सड़कों को नो वेंडिंग जोन किया गया है। वह गंदगी व सिंगल यूज प्लास्टिक के चालान करें। प्रत्येक जोन इंचार्ज व नगर पालिका अधिकारियों को कम से कम 50 मासिक चालान अवश्य करने को कहा गया है। निगम क्षेत्र में अभी तक सिंगल यूज प्लास्टिक के 87 चालान किए गए हैं। डोर टू डोर कूड़ा एकत्रीकरण कार्य 100 प्रतिशत होना चाहिए।
पांच प्रतिशत से अधिक कर्मियों को छुट्टी न दें
निगमायुक्त ने अधिकारियों व नपा सचिवों को निर्देश दिए कि वह सफाई कर्मचारियों की छुटि्टयों पर नियंत्रण करें। बिना वजह किसी भी कर्मचारी को छुट्टी न दी जाए। कुल सफाई कर्मचारियों में पांच प्रतिशत तक ही कर्मचारियों को छुट्टी दी जाए, ताकि शहर में सफाई का कार्य प्रभावित न हो।