स्का़डा परियोजना पर खर्च होंगे 22.85 करोड़ रुपये, 12 12 डिस्पोजल व चार आईपीएस पर लगेगा स्काडा सिस्टम
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कर्णनगरी के जलनिकासी की व्यवस्था अब ऑटोमैटिक होगी। जैसे ही कोई पंप खराब हुआ तो उसका मैसेज तत्काल ट्रांसमीटर सेंटर में जाएगा, वहां से स्वत: ही जारी होने पर संकेत पर तैयार स्डैंडबाय पर रखी गई मोटरें संचालित हो जाएंगी। किस नाले में कितना पानी बह रहा है, इसकी जानकारी भी सेंटर पर प्रदर्शित होती रहेगी। ये सब होगा, स्काडा परियोजना के तहत, जिसे अब नगर निगम ने लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है, सबसे पहले इसी 12 डिस्पोजल तथा 4 इंटरमिडिएट पंपिंग स्टेशन (आईपीएस.) लागू करने की तैयारी है। इस पर करीब 22.85 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
नगर निगम आयुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने बताया कि परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर.) तैयार कर अनुमोदन के लिए निदेशालय शहरी स्थानीय निकाय को भेजी गई थी। इस पर कुछ जानकारी मांगी गई है, जिसका अनुपालन पूरा करके शुक्रवार तक डीपीआर. को दोबारा निदेशालय भेज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि परियोजना पांच वर्ष का संचालन और रख-रखाव भी रहेगा, कुल लागत में शामिल रहेगा। परियोजना के तहत डिस्पोजल व आईपीएस. पर विभिन्न प्रकार के स्काडा उपकरण लगाए जाएंगे। इनमें रेन गेजिस, फ्लोमीटर, सोफ्ट स्टाटर, लेवल ट्रांसमीटर, लेवल सेंसर, राडार लेवल ट्रांसमीटर, इलेक्ट्रो-मेग्नेटिक फ्लोमीटर, प्रोसेस कंट्रोल पीएलसी, स्काडा ऑटोमेशन, वीएफडी. ड्राईव्स तथा मोटर, पंपिंग सेट, स्लूज वाल व स्लूज गेट को स्वत: नियंत्रित करने वाले उपकरण लगाए जाएंगे।
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इन पर लगेंगे संयंत्र
- स्काडा परियोजना में डिस्पोजल में गुरू हरकिशन पब्लिक स्कूल सेक्टर-13 एक्सटेंशन, एचएसवीपी. ऑफिस क्वाटर सेक्टर-13 एक्सटेंशन, कर्ण कॉमर्शियल सेंटर नजदीक बूथ न. 199, नजदीक पुरानी सब्जी मंडी ब्रिज सेक्टर-14, नजदीक कृष्णा मंदिर सेक्टर-14, सेक्टर-14 जीटी. रोड नजदीक इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप, अटल पार्क सेक्टर-8, बलड़ी चौक नजदीक नया बस अड्डï, गांव दहा, नजदीक रेलवे अंडर ब्रिज शिव कॉलोनी, सूरज नगर डिस्पोजल तथा 72 इंच डिस्पोजल एन.एच.-44 शामिल हैं। इसके अतिरिक्त गांव सैदपुरा, नजदीक हैरीटेज लॉन, मीरा घाटी तथा हकीकत नगर स्थित इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन पर भी लगाया जाएगा।
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यह होगा फायदा-
- निगमायुक्त ने बताया कि बारिश के सीजन में डिस्पोजल पर लगे पंप स्वचालित रूप से स्मार्ट वर्क करेंगे। ज्यादा व कम बारिश होने की सूरत में नालों से कितना पानी आ रहा है, रेन गेजिस, फ्लोमीटर व रडार लेवल ट्रांसमीटर इसका पता लगाएंगे और उतनी ही क्षमता की पंप मोटरें स्वचालित हो जाएंगी। पंप खराब होने की स्थिति में स्टैंडबाय पर रखे पंप को नियंत्रण कक्ष से ही चालू कर दिया जाएगा। डिस्पोजल व आईपीएस. का तमाम सिस्टम स्काडा के जरिए नियंत्रण कक्ष में लगी स्क्रीन पर नजर आएगा। तेज बारिश में भी सारा कार्य बिना किसी देरी के हो पाएगा। बरसाती पानी की निर्बाध रूप से निकासी होगी और शहर में जल भराव की समस्या का स्थाई समाधान होगा।