माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। दो साल तक नई प्रॉपर्टी आईडी के सर्वे, तैयारी और वितरण के बावजूद अब नगर निगम पुरानी प्रॉपर्टी आईडी पर ही चालू वित्त वर्ष के प्रॉपर्टी टैक्स के बिल जारी करेगा। पुरानी प्रॉपर्टी आईडी 1.41 लाख तो नई आईडी 1.62 लाख हैं। सर्वे कंपनी द्वारा समय पर आपत्तियों को दूर न किए जाने के कारण एक अप्रैल से नई प्रॉपर्टी आईडी लागू नहीं हो सकी हैं। अब 30 अप्रैल के बाद सर्वे कंपनी याशी के कर्मचारी भी निगम से चले गए हैं। हालांकि निगम का कहना है कि उसे अभी तक स्थानीय निकाय मुख्यालय या याशी कंपनी की ओर से ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है, जिससे ये बात स्पष्ट होती है कि कंपनी के कर्मचारी 30 अप्रैल के बाद कार्य नहीं करेंगे।
एक दशक से भी अधिक समय से नगर निगम 1.41 लाख संपत्तियों से ही टैक्स वसूलता आ रहा है, जबकि इतने साल में शहर में भवन आदि संपत्तियों की संख्या तेजी के साथ बढ़ी है। दो साल पहले हरियाणा में नई प्रॉपर्टी आईडी बनाने के लिए याशी कंपनी ने ड्रोन सर्वे किया। इसमें 60 से 70 फीसदी गड़बड़ी सामने आने के बाद कंपनी ने घर-घर जाकर सर्वे किया और 1.62 लाख नई प्रॉपर्टी आईडी तैयार करते हुए पुरानी आईडी के साथ ही नई प्रॉपर्टी आईडी अंकित करके रि-असिस्मेंट नोटिस का वितरण किया। हजारों की संख्या में ऐसे संपत्तिधारक, जो मौके पर रहते नहीं हैं, खॉली प्लॉट पड़ा है। ऐसे लोगों को निगम में आकर नोटिस प्राप्त करना था, लेकिन जानकारी के अभाव में वो नोटिस लेने नहीं पहुंचे। बड़ी संख्या में ऐसे मामले भी हैं, जिनकी प्रॉपर्टी आईडी में संशोधन होना है या फिर रजिस्ट्री की समस्या है। यही कारण रहा कि नगर निगम में एक अप्रैल से नई प्रॉपर्टी आईडी लागू नहीं हो सकी। यदि ऐसा होता तो निगम को 1.62 लाख आईडी पर टैक्स मिलता।
ऑनलाइन करें आवेदन
याशी कंपनी के अर्बन प्लानर उत्कर्ष पांडेय ने बताया कि एग्रीमेंट के अनुसार उनके कर्मचारियों को 30 अप्रैल तक ही निगम में बैठना था, जो आपत्तियां आईं थी, सभी का समाधान कर दिया गया है। ऐसा नहीं है कि इसके बाद प्रॉपर्टी आईडी में संशोधन नहीं होगा, ये क्रम तो चलता रहेगा, लेकिन ऑनलाइन होगा। इसलिए अभी यदि किसी का संशोधन आदि रह गया है तो वह ऑनलाइन अप्लाई कर सकता है।
नई आईडी लागू नहीं हो सकीं
नगर निगम के कर अधीक्षक गगनदीप सिंह ने बताया कि अभी नई प्रॉपर्टी आईडी लागू नहीं हो सकी हैं। नए वित्तीय वर्ष का एक महीना बीत चुका है, इसलिए अब पुरानी प्रॉपर्टी आईडी पर ही नगर निगम द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स का बिल बनाकर संपत्तिधारकों को भेजा जाएगा, क्योंकि पुरानी आईडी भी नई प्रॉपर्टी आईडी के साथ जुड़ी है, लेकिन 1.41 लाख के अलावा करीब 21 हजार नई प्रॉपर्टी आईडी जो बचेगी, उन्हें नई प्रॉपर्टी आईडी लागू होने के बाद बिल जारी कर दिया जाएगा। याशी कंपनी या स्थानीय निकाय निदेशालय की ओर से निगम को ऐसे कोई लिखित आदेश नहीं मिले हैं कि कंपनी के कर्मचारी कब तक बैठेंगे। जब आदेश आएंगे, तभी मानेंगे।