करनाल जिले के रसूलपुर कलां गांव में मक्खियों के आतंक से परेशान लोगों ने बुधवार को मिल बैठकर सीएम कैंप आवास पर डेरा डालने की रणनीति पर मंथन किया। ट्रैक्टर ट्रालियों और वाहनों की व्यवस्था का जिम्मा अलग-अलग लोगों को सौंपा गया। गांव वालों के अनुसार अब समस्या का समाधान होने पर ही वह गांव लौटेंगे। वीरमती, कमला देवी ने कहा कि हलका विधायक हरविंद्र कल्याण से भी जवाब मांगा जाएगा। विधायक बनने के बाद वे एक बार भी गांव में नहीं आए।
खाने भी नहीं दे रही मक्खियां
ग्रामीण ललित, हरेश, दीपचंद राणा बताते हैं कि रोजाना खाने-पीने के दौरान बच्चे पता नहीं कितनी मक्खियां निगल जाते हैं। वे न तो सो पाते हैं और न ही जाग पाते हैं। हर घर में बच्चे बीमार हैं। उल्टी-दस्त, बुखार की शिकायत आम है। कुछ लोगों ने मजबूर होकर घर छोड़ दिए और करनाल में किराए पर रहने लगे हैं। अरुण और ज्ञानचंद ने बताया कि गांव के सरपंच करनाल में रहने लगे हैं। युवा प्रतीक कुमार कहते हैं कि विधायक के पास गए डीसी के पास गए, किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। अब पूरे गांव ने फैसला लिया है कि अब इस गांव में या तो इंसान रहेंगे या फिर मक्खियां। फैसला सरकार को करना है। उन्होंने सीएम से मदद की गुहार लगाते हुए कहा कि ये मक्खियां उनकी बच्चों की जान ले लेंगी, इसलिए उनको इनसे छुटकारा चाहिए।
गांव में पिता की मौत, संस्कार शहर में
ग्रामीणों की पीड़ा सिर्फ यही नहीं है। दर्द ऐसे भी हैं कि बताते ग्रामीण रोने लग जाते हैं। ग्राम पंचायत सदस्य अशोक के पिता बेलाराम का मंगलवार को निधन हो गया। गांव के लोगों का संस्कार भी गांव में ही होता है, लेकिन यहां भी मक्खियां समस्या बन कर खड़ी हैं। इसलिए परिवार के सदस्यों ने फैसला लिया कि संस्कार करनाल में किया जाएगा, क्योंकि अगर गांव में संस्कार किया तो 13 दिन तक गांव में ही शोक जताने के लिए बैठना पड़ेगा, लेकिन इस दौरान आने वाले सगे संबंधी मक्खियों के कारण बैठ नहीं पाएंगे और उन्हें परेशानी उठानी पड़ेगी, इसलिए संस्कार करनाल में किया गया। बेलराम का एक बेटा करनाल में रह रहा है।
बच्चे हैं साफ्ट टारगेट
मक्खियों से यूं तो पूरा गांव और हर वर्ग परेशान है, लेकिन इनका सबसे साफ्ट टारगेट हैं बच्चे। हर घर में बच्चे लगातार बीमार हो रहे हैं। दिनभर मक्खियां उन पर भनभनाती रहती हैं। इसके अलावा खाने और पीने की चीजों को किसी भी स्थान पर रखा जाए, लेकिन मक्खियां उन पर बैठ जाती हैं। ऐसे में ग्रामीण जाने अनजाने मक्खियां तक खा रहे हैं, जिस कारण वे बीमार पड़ रहे हैं। वहीं, बुजुर्ग भी ज्यादा तंग हैं, क्योंकि वे पंखे के सामने भी हाथ हिलाकर मक्खियां हटाते रहते हैं।