माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। गन्ना प्रजाति डुप्लिकेट सीओएच-160 ने चीनी मिलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। असंध की हैफेड चीनी मिल को तो इस प्रजाति ने चीनी रिकवरी के मामले में राज्य में सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया है। यही कारण है कि इस बार चीनी मिल ने आगामी पेराई सत्र में इस प्रजाति का गन्ना न खरीदने का फैसला किया है। चीनी मिल प्रबंधन ने कहा कि पेराई सत्र 2023-24 के लिए न तो इस प्रजाति के गन्ना का सर्वे कराया जाएगा, न ही बॉडिंग की जाएगी। किसानों से सीओ-15023 आदि उन्नतशील प्रजाति का गन्ना बोने का आह्वान किया गया है। चीनी मिल अनुदान भी देगी।
जिले के कई क्षेत्रों में किसानों तक एक डुप्लीकेट गन्ना प्रजाति पहुंच गई है। हालांकि किसान इसे सीओएच-160 के नाम से जानते हैं। इसका उत्पादन तो लगभग उन्नतशील अन्य प्रजातियों जैसा ही है, इस कारण किसानों को तो कोई खास नुकसान नहीं है, लेकिन इसमें चीनी रिकवरी सिर्फ 6 से 6.50 प्रतिशत तक ही है, जिससे चीनी मिलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। असंध की हैफेड चीनी मिल क्षेत्र में मौजूदा पेराई सत्र में करीब 20 प्रतिशत किसानों ने इसी प्रजाति का गन्ना लगाया है, हालांकि चीनी मिल इस साल ये गन्ना खरीद रही है, क्योंकि किसानों के साथ बॉडिंग कर चुकी है लेकिन अगले सत्र में इस प्रजाति का गन्ना खरीदने से चीनी मिल ने स्पष्ट मना कर दिया है।
हैफेड चीनी मिल असंध के महाप्रबंधक ब्रह्मप्रकाश ने बताया कि गन्ना पेराई सत्र 2022-23 में सभी किसानों का गन्ना समय पर खरीदा जाएगा। भुगतान भी किसानों के खातों में दिया जा रहा है। लेकिन डुप्लीकेट गन्ना किस्म सीओएच-160 को अगले सत्र में नहीं खरीदा जाएगा। न सर्वे होगा और न ही बांडिंग होगी। इसलिए किसानों से अपील है कि वह इस प्रजाति का गन्ना न बोएं। उन्नतशील किस्म सीओ-15023 की बिजाई करें, जिससे किसानों व चीनी मिल दोनों को लाभ होगा।
बीज पर मिलेगा अनुदान
हैफेड चीनी मिल असंध के गन्ना प्रबंधक सुभाष ने बताया कि सीओ-15023 गन्ना प्रजाति जो क्षेत्रीय गन्ना अनुसंधान केंद्र करनाल द्वारा रिलीज प्रजाति है, जिसकी बिजाई पर हैफेड चीनी मिल असंध की ओर से 2000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान दिया जा रहा है और जो किसान सीओ-15023 का गन्ना बीज उपलब्ध करवाता है, उसको भी 500 रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जा रहा है। गन्ना सत्र 2023-24 के लिए किसानों को विभिन्न सुविधाएं देने के लिए मिल ने 611.08 लाख रुपये ब्याज रहित ऋण देने और 79.89 लाख रुपये अनुदान देने की योजना तैयार की है।
ये कौन सी प्रजाति है, इसकी सही जानकारी नहीं है, इसलिए इसे डुप्लीकेट सीओएच-160 कहा जाता है। इस बार भी करीब 20 प्रतिशत किसानों के खेतों में यही प्रजाति है। आज के दौर में रिकवरी 10 प्रतिशत तक चाहिए, लेकिन इसी डुप्लीकेट प्रजाति के कारण पिछले साल मिल की चीनी रिकवरी राज्य में सबसे कम 8.39 रही थी। इस बार अब तक 8.60 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, उम्मीद है कि 9.50 प्रतिशत के करीब पहुंच जाएगी।
- ब्रह्म प्रकाश, महाप्रबंधक हैफेड चीनी मिल, असंध