करनाल। नई शिक्षा नीति के तहत प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था में एक और बदलाव करने जा रही है। अब प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को संस्कारों का ज्ञान दिया जाएगा। इसके लिए संस्कार अध्यापकों की नियुक्ति की जाएगी। ये अध्यापक बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कृति, गौरव और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देंगे। यह परियोजना स्कूल एजुकेशन और साक्षरता मिशन के तहत चलाई जाएगी। इसमें सांस्कृतिक मंत्रालय का भी विशेष सहयोग रहेगा।
नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं पास रखी गई है। आवेदक की उम्र 18 से 42 वर्ष के बीच होनी चाहिए। हालांकि एससी, एसटी व भूतपूर्व सैनिकों या उनके आश्रितों, स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को इसमें तीन वर्ष की छूट रहेगी। इसके अलावा इसके 33 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। चयनित अध्यापकों को रोजाना दो घंटे काम करने के लिए 9240 रुपये मिलेंगे। एक गांव में एक स्कूल होने पर वहीं पढ़ाना होगा। दो स्कूल होने पर अलग-अलग दिन या समय पर सेवाएं देनी होंगी। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रोहताश वर्मा का कहना है कि विभाग की योजना के अनुसार, स्कूलों में संस्कार शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे। इसके लिए प्रक्रिया निदेशालय स्तर पर होगी।
अलग से तैयार हो रहा पाठ्यक्रम
योजना में अध्यापक स्कूल एजुकेशन और साक्षरता मिशन भारत सरकार के विशेष प्रोजेक्ट के तहत संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार व देश की एक नामी संस्थान के तत्वावधान में सभी प्राइमरी स्कूलों में नियुक्त किए जाएंगे। इसके लिए सिलेबस भी तैयार किया जा रहा है। ये अध्यापक अंशकालिक होंगे और ये हर रोज दो घंटे विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे।
निगरानी के लिए बनेगी कमेटी
विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति के प्रति रुचि पैदा करने के लिए सात सदस्यों की एक कमेटी भी बनेगी। इस कमेटी से जुड़ने के लिए 12वीं तक शिक्षित होने के अलावा समाजसेवा से जुड़ा होना अनिवार्य मापदंड बनाया गया है। हालांकि इनका कार्य निगरानी एवं सुझाव देने व विशेष योजना को अमलीजामा पहनाना होगा। यह कमेटी पहले से स्कूल में कार्यरत एसएमसी कमेटी से अलग होगी। वैसे एसएमसी कमेटी के सदस्य भी इससे जुड़ सकते हैं, लेकिन उन्हें शिक्षा से संबंधित मापदंड पूरे करने होंगे, जबकि एसएमसी कमेटी में ऐसा कोई नियम नहीं था।