करनाल। सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में साफ-सफाई और रखरखाव के लिए शिक्षा विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। शिक्षा विभाग के अनुसार अब स्कूलों को दिए गए सफाई व रखरखाव बजट के उपयोग की नियमित निगरानी की जाएगी। किसी विद्यालय में साफ-सफाई या रखरखाव में लापरवाही पाई गई तो इसके लिए संबंधित स्कूल प्रमुख जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।
जिले के 483 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को सफाई, रंगाई-पुताई, बागवानी, मैदान की सफाई और अन्य रखरखाव कार्यों के लिए बजट जारी किया जाएगा। प्रत्येक विद्यालय को इन कार्यों के लिए करीब आठ हजार रुपये तक की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह राशि निर्धारित मदों में ही खर्च की जाए और स्कूल परिसर साफ-सुथरा व व्यवस्थित दिखाई दे। इस राशि का उपयोग कक्षाओं और परिसर की सफाई, शौचालयों के रखरखाव, मैदान की सफाई, पौधारोपण और बागवानी जैसे कार्यों पर किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
जरूरत पड़ने पर लगेंगे श्रमिक
विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन विद्यालयों में पार्ट-टाइम वर्कर या एजुसेट चौकीदार उपलब्ध नहीं हैं, वहां स्कूल प्रमुख को स्कूल प्रबंधन समिति के माध्यम से दैनिक आधार पर श्रमिक लगाकर सफाई और रखरखाव के कार्य करवाने होंगे। इसके लिए अलग से कोई अतिरिक्त बजट नहीं दिया जाएगा और उपलब्ध राशि का ही उपयोग करना होगा। किसी विद्यालय में अगर जारी राशि पर्याप्त नहीं है तो संबंधित अधिकारी जिला स्तर पर इसकी जानकारी भेज सकते हैं। विभाग आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने पर भी विचार कर सकता है, लेकिन इसके लिए खर्च का पूरा विवरण देना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग ने निरीक्षण व्यवस्था को भी मजबूत करने की बात कही है। विभागीय निरीक्षण के दौरान किसी विद्यालय में अगर साफ-सफाई या रखरखाव में कमी पाई जाती है तो इसके लिए स्कूल प्रमुख को जिम्मेदार माना जाएगा और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।