नगर निगम और अटल सेवा केंद्रों से होकर फर्जी अस्थायी प्रापर्टी आईडी बनाने के मामले की जांच अब तहसील कार्यालय की तरफ घूम गई है। वहीं जांच के दायरे में डीड राइटर भी आ गए हैं। पुलिस जल्द इन पर कार्रवाई करेगी। क्योंकि पुलिस की प्रथमदृष्टया जांच में पाया गया है कि 23 रजिस्ट्री ऐसी हैं जिनकी प्रापर्टी आईडी वैध कालोनी की होने के बाद भी उनकी रजिस्ट्री अवैध कालोनी में कर दी गई है। माना जा रहा कि यह काम बिना तहसील कार्यालय की संलिप्तता के संभव नहीं है। हालांकि तहसीलदार का कहना है कि उन्हें वैध आईडी पर अवैध कालोनी में रजिस्ट्री के मामले की जानकारी ही नहीं है। लेकिन पुलिस की जांच में यह खुलासा हो चुका है। अभी 106 रजिस्ट्रियों की जांच बाकी है। जिन लोगों ने अवैध कालोनियों में रजिस्ट्री कराई है, पुलिस उनकी भी कुंडली खंगाल रही है। फिलहाल तो पुलिस ने अभी तक मामले में नगर निगम का कंप्यूटर आपरेटर गांधी नगर निवासी राजीव व अटल सेवा केंद्र संचालक प्रेम नगर निवासी अमित कुमार को गिरफ्तार किया था। दोनों आरोपियों को पुलिस ने दो दिन के रिमांड पर लेने के बाद सोमवार को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।
ऐसे शुरू हुई जांच
नगर निगम के पोर्टल से मोबाइल नंबर 99999 99990 के माध्यम से 209 अस्थायी प्रापर्टी आईडी जारी की गई थी। इसकी जानकारी नगर निगम के किसी अधिकारी को नहीं थी। जब इसकी जानकारी निगम कमिश्नर विक्रम को हई तो उनके निर्देश पर नगर निगम की कार्यकारी अधिकारी निशा शर्मा ने इसकी शिकायत पुलिस को दी और पोर्टल हैक होने की आशंका जताई थी। पुलिस ने 14 फरवरी को केस दर्ज कर मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा प्रभारी संदीप को सौंप दी। इसके बाद पुलिस ने नगर निगम से जारी हुई 209 आईडी की पूरी जानकारी ली और फिर करनाल तहसील से जानकारी ली कि इन आईडी पर कितनी रजिस्ट्री हुई। जिसमें 143 के करीब रजिस्ट्री होनी पाई गई। इसके बाद पुलिस ने 23 रजिस्ट्री की जांच की तो पता चला कि यह रजिस्ट्री अवैध कॉलोनी की है और अस्थायी प्रापर्टी आईडी वैध कॉलोनी की लगाई है। इसके बाद पुलिस ने उस मोबाइल नंबर की जांच की। इस तरह पुलिस ने नगर निगम के कंप्यूटर आपरेटर व अटल सेवा केंद्र के संचालक को पकड़ लिया। जिसने खुलासा किया था कि उसने नगर निगम कर्मी राजीव के साथ मिलकर पोर्टल पर मोबाइल नंबर 99999 99990 को बदला था। जिसपर ओटीपी आया करता था। इसके साथ ही कुछ डीड राइटर ऐसे थे जिन व्यक्तियों को अवैध कॉलोनी की रजिस्ट्री कराने के लिए अस्थायी प्रापर्टी आईडी की जरूरत होती थी तो वह उसके पास ले जाते थे। ऐसे में डीड राइटरों की भी इस मामले में शामिल होने की आशंका है। बता जा रहा है कि आरोपी एक हजार रुपये से करीब 15 हजार रुपये तक एक आईडी के लेता था।
कॉलोनाइजर पर कसेगा शिकंजा
पुलिस अभी उन रजिस्ट्रियों की जांच कर रही है जो अवैध कॉलोनी की हैं। इसके बाद पुलिस उन्हें भी जांच में शामिल करेगी। जिन्होंने अवैध कॉलोनी में रजिस्ट्री कराई है। क्योंकि उन रजिस्ट्रियों में ही वैध कॉलोनी की अस्थायी प्रापर्टी आईडी लगाई गई थी। ऐसे में पुलिस की जांच में जल्द कॉलोनाइजर शामिल होंगे।
जहां की अस्थायी प्रापर्टी आईडी है, वहीं की रजिस्ट्री की गई है। जिन 23 रजिस्ट्रियों की बात की जा रही है। वह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। न ही इस बारे में पुलिस से उनके पास कोई सूचना मिली है।
राजबक्श, तहसीलदार करनाल
फर्जी अस्थायी प्रापर्टी आईडी जारी करने वाले दोनों आरोपियों को दो दिन के पुलिस रिमांड के बाद जेल भेज दिया है। अभी मामले की जांच की जा रही है। जो भी आरोपी मामले में शामिल हैं, उन सभी को गिरफ्तार किया जाएगा। अभी उन रजिस्ट्रियों की जांच की जा रही है जो फर्जी अस्थायी प्रापर्टी आईडी से हुई है।
-संदीप कुमार, आर्थिक अपराध शाखा प्रभारी करनाल