जिला नागरिक अस्पताल में कोरोना की दूसरी लहर में अस्पताल में रोजाना होने वाली ओपीडी पहले की अपेक्षा करीब 90 प्रतिशत तक कम हुई हैं। ओपीडी के लिए कक्षों में डॉक्टर भी दोपहर को 12 बजे तक ही जांच के लिए बैठते हैं। इस दौरान सभी प्रकार की सामान्य बीमारियों की जांच के लिए इक्का-दुक्का व्यक्ति अस्पताल में पहुंच रहे हैं। इसके अलावा हर माह होने वाली सर्जरियां भी काफी कम हो गईं हैं। ये सर्जरियां 400 से घटकर 100 से भी कम हो गई हैं। केवल इमरजेंसी में ही मरीजों का ऑपरेशन किया जा रहा है।
कोरोना काल से पहले अस्पताल में विभिन्न बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों की रोजाना 2 हजार से ज्यादा ओपीडी होती थी। अब ये घटकर 200 से भी कम हो गई हैं। कोरोना और लॉकडाउन, दोनों के कारण के चलते मरीज नागरिक अस्पताल में आने की बजाय अपने आसपास स्थित निजी अस्पतालों व क्लीनिकों से दवाइयां लेकर इलाज करवाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। वर्ष 2020 में कोरोना की पहली लहर कम होने के बाद अस्पताल में बंद ओपीडी फिर से शुरू होकर प्रतिदिन की 1200 से ज्यादा होने लगी थी। अब फिर से हालात पहले की तरह हो गए हैं। कोरोना काल से पहले नागरिक अस्पताल में रोजाना एक दर्जन से ज्यादा सर्जरी होती थी। इनमें गर्भवती महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी, पथरी, रसौली व अन्य बीमारियों की सर्जरी शामिल थी। अब केवल गर्भवती महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी के लिए ही सर्जरी हो रही है। इसके अलावा अगर कोई मरीज गंभीर है तो उसकी सर्जरी की जा रही है। महीने भर में 400 के करीब होने वाली सर्जरी अब घटकर 100 से भी कम रह गई है।
वेटिंग में रखे गए मरीज
हालांकि सर्जरी करवाने वाले काफी मरीज निजी अस्पतालों में भी सर्जरी करवा रहे हैं, लेकिन जो मरीज पहले से ही सरकारी अस्पताल से अपना इलाज करवा रहे हैं, वे अभी वेटिंग में हैं। जिनको ज्यादा दिक्कत नहीं है, ऐसे मरीजों का फिलहाल दवाएं देकर ही इलाज किया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में होने पर ही सर्जरी व ओपीडी सुचारु हो पाएगी। जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. रेनू चावला ने कहा कि ओपीडी के लिए आने वाले मरीजों की संख्या फिलहाल काफी कम है। डॉक्टर दोपहर तक मरीजों की जांच कर रहे हैं। महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी व इमरजेंसी में सर्जरी की जा रही है।