माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जिले में धान खरीद सीजन के बाद राइस मिलों को कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के लिए दिए धान के बाद एफसीआई को चावल लौटाने के मामले में राइस मिल शुरुआती दौर से ही पिछड़ते नजर आ रहे हैं।
खाद्य आपूर्ति विभाग के सभी 150 राइस मिल अभी तक सिर्फ 40 के स्थान पर सिर्फ 14 प्रतिशत सीएमआर की आपूर्ति ही दे पाए हैं। आपूर्ति को शीघ्रता से बढ़ाने के लिए जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) ने इन सभी राइस मिल संचालकों को नोटिस जारी किया है, जिसमें समय पर आपूर्ति नहीं देने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
खाद्य आपूर्ति के 150 राइस मिल सहित हैफेड और एचडब्ल्यूसी की ओर से जिले के कुल 231 राइस मिलों को इस बार सीएमआर का कार्य दिया गया है। डीएफएससी व अन्य एजेंसियों की संयुक्त टीमों की ओर से पहला सत्यापन (पीवी) करा ली गई है। जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक अनिल कुमार ने बताया कि सभी राइस मिलों का स्थलीय सत्यापन पूरा कर लिया है।
फिलहाल किसी राइस मिल में कोई खास गड़बड़ी नहीं मिली है। किसी किसी राइस मिल में 10 से 20 क्विंटल तक कम तो किसी में अधिक धान भी था, लेकिन अभी धान की कुटाई आदि का कार्य चल रहा है, इसलिए इसे गड़बड़ी नहीं माना जा सकता है।
डीएफएससी ने बताया कि राइस मिलों की सीएमआर डिलीवरी कम है। अभी तक राइस मिल संचालकों को 40 प्रतिशत डिलीवरी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को कर देनी चाहिए थी लेकिन खाद्य आपूर्ति के 150 राइस मिलों द्वारा औसतन कुल 14 प्रतिशत ही डिलीवरी हो पाई है।
राइस मिल संचालकों ने इसके बीच में मौसम व अन्य कई कारण भी बताए हैं। फिलहाल सभी 150 राइस मिल संचालकों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं, जिसमें उनसे समय पर लक्ष्यानुरूप सीएमआर की आपूर्ति करने को कहा गया है, ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। बताते हैं कि इसी तरह हैफेड व एचडब्ल्यूसी के राइस मिलों की आपूर्ति भी लक्ष्यानुरूप नहीं हो पाई है।