करनाल। इंद्री के फाजिलपुर गांव के खेत में खोदे गए गड्ढे में गिरने से सात वर्षीय मासूम की मौत के बाद भी सबक नहीं लिया जा रहा। शहर में भी खुले गड्ढे लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं।
अमर उजाला की पड़ताल में दो स्थानों पर बड़ी लापरवाही सामने आई। कहीं एक महीने से गहरा गड्ढा खुला पड़ा है तो कहीं मुख्य बाजार की सड़क पर कई जगह खुदाई के बाद सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। इन स्थानों पर कभी भी हादसा हो सकता है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से खतरा दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नजर नहीं आ रहा।
सेक्टर-12 : बच्चों के खेलने की जगह के पास गड्ढा
सेक्टर-12 में निर्मल कॉलोनी के नजदीक संडे मार्केट की जगह पर करीब 20 फीट चौड़ा और 10 फीट गहरा गड्ढा एक महीने से खुला पड़ा है। आसपास न तो कोई मजबूत बैरिकेडिंग दिखाई देती है और न ही लोगों को खतरे से आगाह करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था है। गड्ढे के पास करीब 20 झुग्गियां हैं। इनमें रहने वाले परिवारों के बच्चे आसपास खेलते रहते हैं। ऐसे में बच्चों का खेलते समय गड्ढे में गिरना गंभीर हादसे का कारण बन सकता है। इसके बावजूद हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) और नगर निगम की ओर से इस तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा।
कुंजपुरा रोड : मुख्य बाजार में जगह-जगह खुदाई, जान जोखिम में
शहर के प्रमुख बाजार कुंजपुरा रोड पर भी लापरवाही का ऐसा ही नजारा है। यहां पाइपलाइन डालने के लिए करीब 25 दिन पहले सड़क खोदी गई थी। अब रास्ते में 10 से ज्यादा जगहों पर गड्ढे बने हुए हैं। इनके आसपास सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। खुदाई से निकली मिट्टी भी सड़क पर पड़ी है। बारिश के दौरान मिट्टी में फिसलन होने से दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए खतरा बढ़ जाता है। इस बाजार में करीब 150 शोरूम और दुकानें हैं। रोजाना बड़ी संख्या में लोग खरीदारी और दूसरे कामों के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसे में सड़क पर खुले गड्ढे और बिखरी मिट्टी किसी भी समय हादसे की वजह बन सकते हैं।
हादसे के बाद जिम्मेदारी किसकी?
अधिवक्ता राजेश शर्मा और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ शुभम व तेजपाल का कहना है कि सवाल यह भी है कि खुदाई के बाद सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है और काम पूरा होने तक लोगों की सुरक्षा की निगरानी कौन करेगा। संबंधित विभागों को हादसे का इंतजार करने के बजाय तत्काल कदम उठाने चाहिए।