मोटर व्हीकल एक्ट के नए नियमों और भारी भरकम जुर्माने को लेकर बेशक लोग नाराजगी भी जाहिर कर रहे हों, लेकिन पुलिस के आंकड़े बता रहे हैं कि ये चालान अच्छे हैं। 1 सितंबर से लेकर 11 सितंबर तक जिलेभर में सड़क हादसों जबरदस्त गिरावट आई है। सबसे अच्छी और अहम बात ये है कि एक भी बाइक सवार की मौत नहीं हुई है। हेलमेट हमारी किस प्रकार से सुरक्षा करता है, ये आंकड़े इसका प्रमाण है। पिछले दस दिनों में दो लोगों की मौत हुई है, उनमें एक साइकिल सवार शामिल है और दूसरा कार सवार। दूसरा घायलों की बात करें चार लोग घायल हुए हैं, हेलमेट होने के कारण इनकी जान बच गई। ऐसे में रोड सेफ्टी विशेषज्ञ मानते हैं कि ये चालान अच्छे हैं, कम से कम सड़क पर जिंदगी सुरक्षित रहेगी।
बता दें कि नए नियम लागू होने से पहले पहले जहां करनाल जिले में रोजाना औसतन एक या दो लोगों की मौत सड़क हादसों में होती थी। 1 अप्रैल 2017 से 31 जुलाई 2019 तक की बात करें तो जिले में कुल 1562 सड़क हादसे हुए। इनमें 788 लोगों की जान गई, जबकि 1263 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। ऐसे में प्रतिदिन के हिसाब से आंकलन किया जाए तो करनाल में प्रतिदिन औसतन दो हादसे हुए और एक व्यक्ति की जान गई। इसके साथ ही घायलों की बात करें तो हर दो दिन में तीन लोगों को गंभीर चोटों का सामना करना पड़ा। इनमें खास बात ये है कि 60 प्रतिशत हादसों में टू व्हीलर शामिल हैं। ताजा हालात पर ट्रैफिक पुलिस से जुुटाए आंकड़ों के अनुसार, नए नियम लागू होने के बाद से हादसों में कमी आई है। रोड सेफ्टी के विशेषज्ञ मानते हैं कि ये सब भारी भरकम चालान के भय से हुआ है। पहले जुर्माना कम होने के कारण लोग नियम तोड़ते थे, जबकि अब ज्यादातर लोग हेलमेट लगाते हैं और सीट बेल्ट का प्रयोग कर रहे हैं। साथ ही ओवरस्पीड और ट्रिपल राइडिंग नहीं होने के कारण हादसों की संख्या में कमी आई है।
चालान से लाखों का मिल रहा राजस्व
1 सितंबर से अब तक करीब एक हजार लोगों के चालान किए जा चुके हैं। इनमें ज्यादातर बिना हेलमेट और बिना सीट बेल्ट के हैं। जिलेभर में पुलिस की टीमें फिलहाल नियमों के प्रति लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं। चालान से सरकार को राजस्व की भी लाखों रुपये की प्राप्ति हो चुकी है। इसके अलावा, जिलेभर में हेलमेट की बिक्री बढ़ चुकी है और वाहनों का प्रदूषण प्रमाण पत्र बनवाने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। इससे भी सरकार का रेवन्यू मिल रहा है।
सख्ती से ही बदलती है आदत : डा. सुरेश
इस बारे में मनोवैज्ञानिक डॉ. सुरेश कुमार का कहना है कि ये मनुष्य की प्रवृति है। पहले भी हम चंडीगढ़ व दिल्ली में नियमों का पालन करते थे, क्योंकि वहां सिफारिश नहीं चलती। हमारी आदत बनी हुई है जहां काम चल जाए, वहां तक चलाओ। लेकिन अब नियम सख्त होने के कारण लोगों की सोच बदली है और उनको पता है कि इसमें आर्थिक नुकसान ज्यादा है। इससे पहले कम जुर्माना था तो लोगों मे ये था कि कोई नहीं नियम टूटता है तो जुर्माना दे देंगे, लेकिन अब जुर्माना कई गुणा हो गया है और पहले के मुकाबले पुलिस भी ज्यादा अलर्ट हो गई है। इसी कारण लोग यातायात नियमों का पालन कर रहे हैं और इसके अच्छे परिणाम ये हैं कि हादसे कम हो रहे हैं।
पुलिस का उद्देश्य लोगों की सुरक्षा : एसपी
इस बारे में एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया का कहना है कि पुलिस का कार्य केवल चालानिंग का नहीं है, चालान केवल इसलिए किए जाते हैं, ताकि लोगों में इस बात रहे कि नियम तोड़ा तो चालान होगा। ये अच्छी बात है कि दस दिनों में किसी भी बाइक चालक की हादसों में किसी की जान नहीं गई। मैं जिला वासियों से अपील करता हूं कि वे नियमों का पालन करें और लोगों को भी इसके लिए जागरूक करें। हम कोशिश करेंगे कि और भी अच्छे परिणाम आएं और लोगों की जान बच सके।