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नई शोध कर पशुपालकों को करें जागरूक : ऊषा रानी

Fri, 30 Oct 2015 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
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राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल और राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंध संस्थान, हैदराबाद की ओर से आयोजित अखिल भारतीय पशुपालन अधिकारियों की कार्यशाला का बृहस्पतिवार को समापन हो गया। इसमें 12 राज्यों के 37 पशुपालन अधिकारियों ने पशुपालन में आने वाली समस्याओं पर मंथन किया और विशेषज्ञों ने उनके समाधान के लिए नई नई सिफारिशें पेश की।
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समापन समारोह में वी. उषा रानी, महानिदेशक, राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंध संस्थान, हैदराबाद ने मुख्य अतिथि के रूप पर शिरकत की और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। कार्यशाला के दौरान डेयरी पशुओं के स्वास्थ्य, आवास एवं आश्रय प्रबंधन, पशुओं में बांझपन एवं प्रजनन प्रबंधन, डेयरी उत्पादों में मिलावट की जांच के लिए किट, प्रगतिशील किसानों के खेतों का दौरा और जलवायु परिवर्तन और डेयरी फार्मिंग आदि विषयों पर चर्चा की गई।

वी. उषा रानी ने कहा कि भारत में ज्यादातर ग्रामीण आबादी पशुधन पर निर्भर करती है। इस क्षेत्र में सालभर रोजगार पाने की संभावना है। गांवों में पशुपालन सदियों से हो रहा है, लेकिन समय के साथ साथ पशुपालन में अनेक समस्याएं पैदा हो गई हैं। जिनके समाधान के लिए वैज्ञानिकों को नई शोध करने के साथ साथ पशुपालकों को जागरूक करने की भी जरूरत है।
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पशुपालन भारतीय कृषि का अभिन्न अंग
एनडीआरआई के निदेशक डॉ. एके श्रीवास्तव ने कहा कि पशुपालन भारतीय कृषि का एक अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि इस समय देश के लोगों के लिए पोषण सुरक्षा की ओर ध्यान करने की जरूरत है। पशुपालन में पोषण सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है।

उन्होंनेे कहा कि वर्तमान में हिंदुस्तान 144 मिलियन टन दूध उत्पादन कर प्रथम स्थान पर है और एक दिन में 300 ग्राम प्रति व्यक्ति उपलब्धता है। इस अवसर पर डॉ. खजान सिंह, अध्यक्ष डेयरी विस्तार प्रभाग, राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंध संस्थान के उप निदेशक डॉ. एन बालासुब्रमणि, डॉ. बीएस मीणा, डॉ. ऋतु चक्रवर्ती, डॉ. गोपाल सांखला सहित अन्य वैज्ञानिक मौजूद रहे।
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