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ओवरलोडिंग रोकने का नया फार्मूला, पोर्टेबल मोबाइल कांटे लेकर फिल्ड में उतरी आरटीए टीम

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ओवरलोड रोकने के लिए एक और इंतजाम किया गया है। अब परिवहन विभाग ने अपनी जांच टीम को हाईटेक करते हुए उन्हें पोर्टेबल मोबाइल कांटे उपलब्ध कराए हैं। ऐसे में चेकिंग के दौरान टीम इन कांटों को सड़क पर बिछाएगी। जैसे ही वाहन का पहिया इस पर चढ़ेगा, तुरंत टीम को पता चल जाएगा कि वाहन में कितना लोड है। यदि ओवरलोड पाया गया तो तुरंत कार्रवाई होगी। करनाल की आरटीए टीम दो मोबाइल कांटों को लेकर फील्ड में उतर चुकी है। अब नई व्यवस्था से ही कार्रवाई की जाएगी। विभाग का यह भी दावा है कि जांच टीम को चकमा देकर अब ओवरलोड वाहन नहीं भाग सकेंगे। पहले भी सरकार और विभाग ओरवरलोड रोकने के लिए कई कदम उठा चुका है लेकिन हर इंतजाम फेल साबित हुए। दिन रात चेकिंग करके विभाग की टीम हर माह औसतन 150 वाहन ही पकड़ पाती है। इससे सरकार को करोड़ों रुपये का रेवेन्यू तो मिला लेकिन ओवरलोड पूरी तरह बंद नहीं हो पाया। विभाग की टीम छोटी होने व कम इंतजामों के कारण जितने वाहन टीम माह में पकड़ती है, करीब उससे ज्यादा वाहन चकमा देकर फरार हो जाते हैं।
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लाचारी : आज तक अपना कांटा ही नहीं, तोल को टोल और मिल का सहारा...
ओवरलोड पर कार्रवाई के लिए आरटीए टीम के अलावा डीसी, एडीसी, एसडीएम और पुलिस को भी पावर है। लेकिन आरटीए टीम के अलावा कोई भी ऐसे वाहनों पर कार्रवाई नहीं करता। वहीं सालों से आरटीए टीम भी उधार के इंतजामों पर ही ओवरलोड पर कार्रवाई कर रही है। आज तक टीम के पास जिले में अपना कहीं भी सरकारी कांटा नहीं है। पकड़े गए वाहनों को तोल के लिए नेशनल हाईवे-44 पर या बसताड़ा टोल के कांटे पर ले जाते हैं। या फिर जिले के विभिन्न स्टेट हाईवे स्थित राइस मिल के कांटों का सहारा लिया जाता है।
तीन साल में ओवरलोड रोकने के लिए ये उठाए कदम, 18 विभागों के नाके भी रहे फेल
-अफसरी फेरबदल : 2017 में एचसीएस अधिकारी से आरटीए का चार्ज लेकर आईएएस अधिकारी एवं एडीसी को यह चार्ज दिया गया। लेकिन तीन साल के प्रयोग के बाद फिर 2020 में एचसीएस अधिकारी को आरटीए सचिव बना दिया। अब इस पद को खत्म करते हुए डीटीओ का नया पद सृजन किया। साथ ही एडीसी को यह भार अतिरिक्त सौंप दिया। अब पुलिस कर्मचारियों को भी आरटीए विभाग में नियुक्त किया है।
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-इंटर स्टेट चैकपोस्ट : 5 जनवरी 2018 में ओवरलोड पर नकेल के लिए करनाल में इंटर स्टेट चेकपोस्ट लगाए थे। जहां रोटेशन में 18 विभागों की टीम जांच करती थी। लेकिन यह प्रयोग महज 118 दिन ही चला, भ्रष्टाचार और वाहन माफिया के हावी होने के बाद इसे 2 मई को बंद कर दिया गया।
-मोबाइल टीम : 13 मार्च 2018 में ओवरलोड रोकने के लिए आईएएस और एचसीएस अधिकारियों की आठ मोबाइल टीमें बनाईं थी। लेकिन ये टीमें भी शुरूआत में कुछ दिन सक्रिय रही।
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12 माह में 1327 वाहनों पर कार्रवाई से 7.89 करोड़ रेवेन्य वसूला
माह चालान जुर्माना रुपये में
जनवरी 83 5143100
फरवरी 103 3698760
मार्च 99 6195800
अप्रैल 0 303000
मई 0 0
जून 26 1762500
जुलाई 128 17430670
अगस्त 111 15325850
सितंबर 119 9036100
अक्तूबर 160 7993470
नवंबर 276 6648600
दिसंबर 222 73537850
कुल 1327 78978450
नोट : मई और जून में लॉकडाउन के कारण कार्रवाई नहीं हुई। परमिट और लाइसेंस बनने से रेवेन्यू आया।
चेकिंग बढ़ने से पहले से कम हुआ ओवरलोड : एडीसी
हमारी टीम लगातार सक्रिय है। 12 माह में रिकॉर्ड कार्रवाई कर रेवेन्यू वसूला। अब पोर्टेबल मोबाइल कांटों से जांच की जाएगी। टीम को निर्देश दे दिए हैं।
-वीना हुड्डा, डीटीओ एवं एडीसी करनाल
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