करनाल। एनडीआरआई की तकनीक और एमएसएमई के प्रोत्साहन से अब नए उद्यमी तैयार किए जाएंगे। इसके तहत उद्यम स्थापित करने के लिए एमएसएमई की ओर से करीब 15 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी। दरअसल, राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) ने दुग्ध व उससे बने उत्पादों को गुणवत्तापरक ढंग से तैयार करने के लिए देश को करीब सौ से अधिक तकनीक दी हैं, जिसे देश की कई बड़ी कंपनियों ने अपनाया है और कई नए उद्यमी बने। लेकिन धनाभाव के कारण उन्हें तत्कालिक गति नहीं मिल पाती है। इसे देखते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) डीएफओ के निदेशक ने सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रस्ताव दिया है। यदि ऐसा होता है तो एनडीआरआई के छात्र व प्रशिक्षु कैंपस से बाहर निकलते ही नए स्टार्टअप बन सकेंगे।
एनडीआरआई के पास विश्वव्यापी तकनीक है। सालों तक वैज्ञानिकों ने कड़ी मेहनत करके दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए पशुओं की नई नस्लों के साथ-साथ चारा, रहन-सहन आदि पर भी कई तकनीक दी हैं। साथ ही दूध से कई उत्पाद लस्सी, घी, बर्फी आदि कई खुद भी बनाकर बाजार में उतारे हैं, साथ ही विभिन्न प्रकार के दुग्ध उत्पाद तैयार करने तथा गुणवत्ता को परखने के लिए कई तरह की किटें आदि तैयार की हैं। जिसे कई बड़े उद्यमियों ने अपनाया और अपना कारोबार भी शुरू किया है।
63 प्रौद्योगिकियों को स्थानांतरित भी किया जा चुका है। एनडीआरआई डीम्ड यूनिवर्सिटी भी है। जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। ये विद्यार्थी कई तरह की तकनीक लेकर निकलते हैं। इनके पास तकनीक तो होती है, लेकिन तत्कालिक धन नहीं होता है। जिससे उन्हें उद्यम शुरू करने में समय लग जाता है या फिर वह दूसरे उद्यमों में चले जाते हैं। जिससे अपेक्षाकृत स्टार्टअप नहीं बन पाते हैं। लेकिन जब बुधवार को एनडीआरआई ने एमएसएमई के साथ कार्यशाला आयोजित की तो इसमें विचार आया कि यदि तकनीक के साथ धन भी उपलब्ध हो जाए तो और अधिक स्टार्टअप शुरू किए जा सकते हैं।
ये हैं प्रस्ताव
एमएसएमई के निदेशक संजीव चावला ने प्रस्ताव दिया है कि एनडीआरआई में पहले से ही इंक्यूवेशन सेंटर है। यदि इस इंक्यूवेशन सेंटर को एमएसएमई से अप्रूव करा लिया जाए तो जो भी विद्यार्थी, उद्यम स्थापित करने के इच्छुक लोग अपना उद्यम स्थापित करना चाहेंगे उन्हें एमएसएमई की ओर से करीब 15 लाख रुपये तक सहायता दे दी जाएगी। तकनीक एनडीआरआई से मिलेगी और धन एमएसएमई की योजना से मिल जाएगा तो उन्हें उद्यम स्थापित करने में कठिनाई नहीं आएगी। अधिकाधिक लोग नौकरी की ओर भागने की बजाय उद्यम स्थापित करके नौकरी देने वाले बन जाएंगे।
वर्जन
एनडीआरआई की तकनीक व एमएसएमई के तहत भारत सरकार की योजना का धन जोड़ दिया जाए तो नए स्टार्टअप तैयार करने में कठिनाई नहीं होगी। इसके लिए एनडीआरआई को एमएसएमई का अप्रूवल प्राप्त करने के लिए आवेदन करना होगा। इसका प्रस्ताव एनडीआरआई के संयुक्त निदेशक (एकेडमिक) को दिया है।
- संजीव चावला, निदेशक एमएसएमई-डीएफओ करनाल (फोटो-1001)
वर्जन
एमएसएमई के निदेशक ने जो प्रस्ताव दिया है। उसे संस्थान के निदेशक डॉ. धीर सिंह के संज्ञान में लाकर विचार विमर्श के बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा। प्रथमदृष्टया प्रस्ताव अच्छा है, क्योंकि एनडीआरआई के पास कई उच्चकोटि की तकनीक है, इसमें यदि विद्यार्थियों, इच्छुक नए उद्यमियों को योजनागत धन मिल जाएगा तो काफी बेहतर होगा।
- डॉ. आशीष कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक) एनडीआरआई, करनाल। (फोटो-1002)