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Karnal News: नई डिस्पेंसरी बढ़ीं, लेकिन दवाओं का वही पुराना बजट

Mon, 19 Jan 2026 02:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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करनाल। जिले में सर्दी बढ़ते ही आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक उपचार के प्रति लोगों का भरोसा तेजी से बढ़ा है। वहीं, पिछले एक साल में जिले में कई नई आयुष डिस्पेंसरी और जुड़ गई हैं, दूसरी ओर दवाओं का बजट अब भी पहले जैसा ही बना हुआ है। जबकि, नागरिक अस्पताल की आयुष ओपीडी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब सर्द मौसम में प्रतिदिन औसतन 100 मरीज आयुष ओपीडी का रुख कर रहे हैं।
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आयुष ओपीडी की ओर बढ़ते रुझान से दवाओं लेने वालों की संख्या तो बढ़ रही है लेकिन पिछले साल नई डिस्पेंसरी जुड़ने के बाद अब जिले में करीब 42 से अधिक आयुष डिस्पेंसरी और सेंटर स्थापित हो चुके हैं। इससे वर्तमान में जो पहले से निर्धारित बजट है, उसी से दवाओं का स्टॉक भी विभाजित हो रहा है। ओपीडी में बढ़ते मरीजों के बीच दवाओं के अधिक स्टॉक की जरूरत पड़ सकती है। जिला नागरिक अस्पताल से आयुर्वेदिक मेडिकल अधिकारी डॉ. सुनील गुप्ता का कहना है कि मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार को बजट बढ़ाने की जरूरत है क्योंकि अब लोग आयुर्वेद पर अधिक भरोसा जता रहे हैं।

- स्त्री रोग और जोड़ों में दर्द की परेशानी वाले मरीज अधिक
सर्द मौसम के कारण और एलोपैथी दवाओं के संभावित दुष्प्रभावों से बचने और सुरक्षित इलाज की चाह में लोग आयुर्वेद व होम्योपैथी को प्राथमिकता दे रहे हैं। आयुष ओपीडी में जुकाम, सर्दी-खांसी, एलर्जी, जोड़ों के दर्द, शरीर में जकड़न और स्त्री रोग से जुड़ी समस्याओं के मरीज अधिक पहुंच रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, रोजाना आने वाले करीब 100 मरीजों में लगभग 60 मरीज आयुर्वेदिक उपचार ले रहे हैं, जबकि करीब 40 मरीज होम्योपैथी दवाओं पर भरोसा जता रहे हैं।
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- आयुर्वेदिक दवाएं बढ़ाती इम्यूनिटी, नहीं होता दुष्प्रभाव
आयुर्वेदिक मेडिकल अधिकारी डॉ. सुनील का कहना है कि सर्दियों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, ऐसे में लोग बार-बार एलोपैथिक दवाएं लेने से बचना चाहते हैं। आयुर्वेदिक दवाएं शरीर की प्रकृति के अनुसार काम कर इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करती हैं, जबकि होम्योपैथी में बिना दुष्प्रभाव के लंबे समय तक इलाज संभव है। यही कारण है कि अब मरीज डिस्पेंसरी की बजाय सीधे नागरिक अस्पताल की आयुष ओपीडी में पहुंच रहे हैं।

- नई दवाएं भी हुईं शामिल
मरीजों की बढ़ती संख्या और मांग को देखते हुए आयुष विभाग में बीते दो महीनों के दौरान करीब 60 नई आयुर्वेदिक दवाएं जोड़ी गई हैं, जिससे अब उपलब्ध दवाओं की संख्या बढ़कर लगभग 100 हो गई है। इनमें फलघृत, सुपारी पाक, निशामलकी चूर्ण, कुटजारिष्ट, विषामलेप और ब्राह्म रसायन जैसी दवाएं शामिल हैं।
आयुष पद्धतियों के प्रति बढ़ता भरोसा लोगों में बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता का परिणाम है। आयुर्वेदिक, यूनानी, होम्योपैथी, योगा और पंचकर्मा जैसी दवाइयों पर लोग अब भरोसा जता रहे हैं। अब मरीज केवल त्वरित राहत नहीं, बल्कि सुरक्षित और दीर्घकालिक इलाज चाहते हैं। इसी कारण सरकारी अस्पताल की आयुष ओपीडी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए सरकार को आयुष विभाग का बजट बढ़ाना चाहिए। - डॉ. सुनील, एएमओ, जिला नागरिक अस्पताल
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