अंबाला के रतन गढ़ की एक बुजुर्ग महिला पीजीआई चंडीगढ़ में कोरोना पाजिटिव पाई गयी है, जबकि इससे पहले कल्पना चावला मेडिकल कालेज में सैंपल जांच के दौरान उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आयी थी।
जानकारी के अनुसार शहर के रतनगढ़ की रहने वाली 62 वर्षीय बुजुर्ग 15 साल से शुगर की मरीज थी। पिछले तीन साल से छावनी नागरिक अस्पताल से उसकी डायलिसिस चल रही थी। महिला की सप्ताह में 2 से 3 बार डायलिसिस हो रही थी। 24 अप्रैल को महिला की हालत नाजुक होने के कारण उसे चंडीगढ़ पीजीआई में रेफर किया गया था। वहां पर उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव पाई गयी है। जैसे ही स्वास्थ्य विभाग को इस बात की सूचना मिली तो हड़कंप मच गया। इससे पहले कैंट अस्पताल से महिला का कोरोना टेस्ट करवाया गया था और रिपोर्ट करनाल कल्पना चावला अस्पताल ने नेगेटिव भेजी थी, लेकिन अगले ही दिन पीजीआई ने महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव बता दी। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के अफसरों का मानना है कि यह कोई बड़ी बात नहीं है कि कोई व्यक्ति आज कोरोना निगेटिव है तो कल की रिपोर्ट में कोरोना पाजिटिव नहीं हो सकता। क्योंकि संक्रमण जांच के टेस्ट के तत्काल बाद भी हो सकता है। यह भी हो सकता है कि शुरुआती दौर में वह जांच रिपोर्ट में पकड़ में न आए।
करनाल से मथुरा गयी बस में एक श्रमिक कोरोना पाजिटिव
करनाल। तीन दिन पूर्व ही करनाल से 34 श्रमिकों को मथुरा के कोसी कलां पहुंचाया गया। इन श्रमिकों में फतेहपुर गांव निवासी युवक के कोरोना पाजिटिव होने का दावा किया गया है। जबकि इस युवक को जांच के बाद ही करनाल से रवाना किया गया था।
दरअसल 26 अप्रैल की सुबह करनाल से 34 श्रमिकों को रोडवेज की बस से मथुरा के कोसी कला भेजा गया था। बस तो कोसी कलां मंडी में उन्हें छोड़कर चली आई लेकिन इसी दिन इनमें से फतेहपुर निवासी एक 27 साल के युवक को कोरोना संदिग्ध मानते हुए रोक लिया गया था, उसके दो भाइयों को भी रोक लिया गया था। मथुरा जिला अस्पताल के डाक्टरों का दावा है कि इस युवक का टेस्ट कराया गया तो वह कोरोना पाजिटिव मिला है। उसे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करके उसके दोनो भाइयों को भी क्वारंटीन कर दिया गया है। यह युवक भी जब करनाल से भेजा गया था तो 25 अप्रैल को अन्य श्रमिकों के साथ इस युवक का भी मेडिकल परीक्षण किया गया था। तब स्थिति ठीक बताई गई थी। यूं तो यह परिस्थिति जन्य हो सकता है लेकिन ऐसे मामलों से आम आदमी के मन में कई सवाल तो उठते ही हैं।