स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल कर्ण नगरी को स्मार्ट पार्कों की दरकरार है। जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए पार्कों में गंदगी के अंबार लगे हैं। लोग सैर नहीं कर पाते हैं, जिससे वह परेशान हैं। प्रशासनिक अधिकारी आमजन की भावनाओं को समझ नहीं पा रहे हैं। शहर में नगर निगम के 45 पार्क और हुडा के करीब 27 पार्कों में सफाई का अभाव है। पार्कों में कहीं सफाई व्यवस्था का अभाव तो कहीं झूले, सौंदर्य, लाइट व पानी जैसी सुविधाओं का न होना चिंता का विषय है। स्मार्ट सिटी के सपने को पूरा करने के लिए निगम प्रशासन को अब पार्कों की दशा में सुधार लाना भी बेहद जरूरी है।
निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली विभिन्न कॉलोनियों में छोटे-बड़े 45 पार्क हैं, लेकिन किसी भी पार्क के हालात ठीक नहीं है, किसी पार्क में झूले टूटे हैं, तो कहीं गंदगी व कूड़ा कर्कट के ढेरों से लोगों की परेशान हैं। वहीं कई पार्कों से ग्रिल व चार दीवारी ही नहीं है। इससे उन पार्कों में हर समय आवारा पशुओं का जमवाड़ा लगा रहता है। शहर के सबसे व्यस्त कर्ण पार्क में अरसे से घास की कटाई नहीं हुई है। इससे पार्क में हुई बड़ी-बड़ी घास से लोगों को परेशानी हो रही है। सेक्टर-13 की पार्क में चार दीवारी न होने से वहां हर समय आवारा पशु घूमते रहते हैं। इससे कोई भी व्यक्ति उस पार्क में सैर नहीं करते, लेकिन प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। शहर की अधिकतर पार्कों की बाउंडरी वॉल व ग्रिल तक टूटी हुई हैं। इससे आवारा पशु उन पार्कों में बेरोकटोक चले आते हैं। अब अधिकांश पार्क लोगों के लिए वॉकिंग प्लेस न रहकर आवारा पशुओं चारागाह बनकर रह गए हैं।
बॉक्स
पार्कों में नहीं लाइट, पानी की सुविधा
शहर की अधिकतर पार्कों में लाइट व पानी की सुविधा नहीं है। इससे पार्कों में समय पर सिंचाई भी नहीं हो रही है। पानी के अभाव में पार्क में लगे पेड़-पौधे व फूल मुरझा गए हैं। वहीं पार्कों में रात के समय लाइट व्यवस्था न होने से शाम ढलते ही पार्कों में अंधेरा छा जाता है। जिन पार्कों में लाइटें लगी हैं, इनमें से ज्यादातर लाइटें खराब हैं। ऐसे में बिना रोशनी के रात के समय पार्क में जाना किसी के लिए जोखिम उठाने से कम नहीं है। पार्कों में झूलों की व्यवस्था न होने से बच्चे भी पार्क में जाने का तैयार नहीं हैं। करोड़ों खर्च के बाद भी निगम लोगों को बेहतर पार्कों की सुविधा नहीं दे पाया है।
बॉक्स
चौराहों पर बनी पार्कों पर अवैध कब्जे
शहर के चौक चौराहों पर बनी पार्क रेहड़ी वालों कब्जे में हैं। इससे उन पार्कों में लगे पेड़-पौधे व फूल सब उजड़ चुके हैं। रेहड़ी माफियों व निगम कर्मियों के बीच सांठगांठ के चलते इल पार्कों की यह दुर्दशा हुई है, लेकिन प्रशासन द्वारा इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया है। निगम द्वारा हुडा की तर्ज पर शहर की पार्कों की देखभाल का काम वेलफेयर सोसायटी को देने का प्रपोजल बनाया था, जिसे पार्षदों ने भी हाउस की तीसरी बैठक में ही पारित कर दिया था। इसके बाद निगम आज तक पार्कों क्षेत्रफल व मेंटेनेंस खर्च का लेख जोखा तैयार नहीं कर पाया है, जिससे करीब दो वर्ष बीतने के बाद भी अभी तक इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ है।
फोटो कोट्स
निगम को शहर की पार्कों की दशा में सुधार लाने की जरूरत है। करोड़ों के लागत से निर्मित पार्क अब निगम प्रशासन की अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। लोगों को भी इन पार्कों का कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
अशोक माणिक, शहरवासी। (फोटो संख्या-5)
-----
पार्कों में सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ, पार्कों की चारदीवारी व झूलों की मरम्मत कराने की आवश्यकता है। स्मार्ट सिटी के सपने को पूरा करने के लिए पार्कों की दशा में सुधार लाना बेहद जरूरी है।
शिव बजाज, शहरवासी। (फोटो संख्या-6)
-------
शहर की सबसे व्यस्तम कर्ण पार्क में सफाई व्यवस्था मजबूत करने के साथ सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की भी आवश्यकता है। इस पार्क में हर समय नशेड़ी व जुआ खेलने वाले लोगों की भीड़ रहती है। इससे वहां पर किसी सभ्य व्यक्ति के लिए पांच मिनट बैठना भी मुश्किल हो जाता है।
सुखराम बेदी, शहरवासी। (फोटो संख्या-7)
फोटो कोट्स
शहर की किसी भी पार्क में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इससे पार्कों में सैर के लिए जाने वाले लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती। लोगों द्वारा खुले में पेशाब करने से गंदगी भी फैल रही है। निगम को इस विषय पर ध्यान देने की जरूरत है।
सुशील राणा, शहरवासी। (फोटो संख्या-8)
वर्जन
शहर की पार्कों की देखभाल का काम वेलफेयर सोसायटियों को दिया जाएगा। इसके लिए निगम द्वारा टीमों का गठन कर शहर की पार्कों का क्षेत्रफल व उसके मेंटेनेंस खर्च का डाटा तैयार किया जा रहा है, जिसके जल्द ही पूरा होने की संभावना है।
-धीरज कुमार, ईओ नगर निगम करनाल।