नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनडीआरआई) के पांच अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। करीब 1.20 करोड़ रुपये के घोटाले में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने जांच के आधार पर एक साल बाद यह कार्रवाई की है। सस्पेंड होने वालों में निकरा (नेशनल इनोवेशन इनक्लाइमेंट रेजिलियलेंट एग्रीकल्चर) प्रोजेक्ट के इंचार्ज व वरिष्ठ साइंटिस्ट डॉ. सोहनवीर सिंह, तत्कालीन लेखा नियंत्रक एस जार्ज समेत तीन अन्य वित्तीय अधिकारी शामिल हैं। हालांकि अभी आईसीएआर की तरफ से विभागीय जांच जारी रहेगी। माना जा रहा है कि मामले में कुछ अन्य भी नपने सकते हैं।
बता दें कि संस्थान की विजिलेंस ऑफिसर स्मिता सिरोही ने मार्च-2016 में सिविल लाइन थाना पुलिस को शिकायत दी थी। आरोप लगाया था मिलीभगत से एनडीआरआई के अकाउंट ब्रांच से करीब डेढ़ करोड़ रुपये अपने खातों में ट्रांसफर किया गया है। इसके बाद आरोपी क्लर्क दीपक कुमार, रिसर्च एसोसिएट सुखविंद्र सिंह व अमरेंद्र श्रीवास्तव, पीएचडी की छात्रा मनप्रीत कौर व विक्रम सिंह के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था। पुलिस ने दीपक, सुखविंद्र को गिरफ्तार कर लाखों रुपये की रिकवरी की थी। सुखविंद्र के कब्जे से खरीद गए जेवरात मिले थे। संस्थान ने मनप्रीत की पीएचडी की डिग्री को रोक दिया था। उसके दाखिले को रद्द कर दिया था। क्लर्क दीपक समेत सभी को नौकरी से निकाल दिया था। मामले की विभागीय जांच आईसीएआर से कराई जा रही है। प्रारंभिक जांच में अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है, इसलिए निकरा प्रोजेक्ट के इंचार्ज डॉ. सोहनवीर सिंह, लेखा नियंत्रक एस जार्ज, प्रशासनिक अधिकारी मिथलेश कुमार, विशाल आचार्य व बलबीर सिंह को सस्पेंड किया गया है। इस मामले को अमर उजाला ने लगातार प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
अपने खातों में ट्रांसफर किये थे पैसे
एनडीआरआई के अंदर ही निकरा प्रोजेक्ट है। इसके तहत मौसम और पशुओं के बीच तालमेल पर रिसर्च होती है। इस प्रोजेक्ट के तहत एनडीआरआई में 1.20 करोड़ रुपये आए, लेकिन कुछ लोगों ने मिलीभगत करके इस पैसे को अपने खातों में ट्रांसफर कर लिया और बिल संस्थान को भेज दिए थे। जांच के दौरान मामला पकड़ा गया और विजिलेंस अधिकारी ने शिकायत पुलिस को दी। पुलिस जांच में सामने आया कि सुखविंद्र सिंह ने अपने अकाउंट में 33 लाख, मनप्रीत कौर के खाते में 37 लाख, विक्रम के खाते में 45 लाख, अमरेंद्र श्रीवास्तव के खाते में आठ लाख और एक लाख रुपये क्लर्क दीपक के खाते में जमा किये गए थे। जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी सुखविंद्र सिंह के पास फाइनेंस विभाग की जानकारी व पासवर्ड थे, जिसके तहत उसने घोटाले को अंजाम दिया।
आईसीएआर की तरफ से पांच अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है। यह रूटीन जांच की प्रक्रिया का एक हिस्सा है। अभी इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। जांच पूरी होने के बाद किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। मामले की विभागीय जांच जारी है।
- डॉ. आरआरबी सिंह, डायरेक्टर, एनडीआरआई