मूनक। हरियाणा विज्ञान मंच व खेती विरासत मिशन पंजाब द्वारा शाहजहांपुर गांव में वीरवार को सरफेस स्प्रेडिंग एवं मल्चिंग तकनीक से गेहूं की फसल पर लगाए गए प्रदर्शन प्लांट पर खेत दिवस का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे कृषि किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक वजीर सिंह ने बताया कि तकनीक धान के खेत में ही अवशेषों को इन सीटू में रखने से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में मदद करेगी।
मुख्यमंत्री ने बजट प्रस्तुत करने के दौरान इन सीटू विधि अपनाने पर 1200 प्रति एकड़ किसानों को अनुदान देने की घोषणा की है। समाजसेवी, पर्यावरणविद्, कृषि विशेषज्ञ विजय सेतिया ने बताया कि उपरोक्त विधि किसानों के लिए वरदान साबित होगी। इससे किसानों की गेहूं की बिजाई पर केवल डीजल का एक हजार ही खर्च आएगा और गेहूं में खरपतवार न होने की वजह से अधिक उपज मिलने के साथ खरपतवार नाशक दवाइयों पर दो हजार से तीन हजार खर्चे में भी बचत होगी। इस अवसर पर भारतीय अनुसंधान संस्थान गेहूं एवं जौं से प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनुज व डॉ. सुभाष गिल ने इस विधि को किसानों के लिए लाभदायक बताया और किसानों को गेहूं की बिजाई धान के अवशेषों में ही करने का सुझाव दिया।
मनवीर सिंह रेढू ने प्राकृतिक खेती जल संरक्षण व मिलेट्स फसलों के बारे में समाज में फैलाई जा रही भ्रांतियों से दूर रहकर मिलेट्स फसलों को अपने भोजन का मुख्य हिस्सा बनाने का सुझाव दिया। हरियाणा विज्ञान मंच जिला टीम की वरिष्ठ सदस्य नीलम ने अपने प्राकृतिक खेती के अनुभव की जानकारी दी। शाहजहांपुर गांव से चौधरी रणधीर सिंह में बताया कि अगले वर्ष में हमारे आसपास गावों के सैकड़ों किसान इस विधि को अपनाएंगे। सुरेंद्र कुमार बसताडा ने हल्दी की खेती के बारे में बताया कि कच्ची हल्दी खाने से कई प्रकार की बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
इस अवसर पर सुभाष कुमार, पवन कुमार, जगतार सिंह, देशराज अलावला, डॉ. राजेंद्र सिंह, जसमेर सिंह, महेंद्र सिंह, कृष्ण कुमार, तिलक राज, शीला देवी, गीता देवी, मौसम, सरोज माफी व अन्य उपस्थित रहे।