संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। दिन की शुरुआत गले की जलन से और रात आवाज बैठने के साथ...। बदलते मौसम ने कई लोगों की आवाज बंद कर दी है। जिला नागरिक अस्पताल की ईएनटी ओपीडी में रोजाना 50 प्रतिशत मरीज गले की खराश, टॉन्सिल की सूजन और नाक बंद होने की परेशानी के साथ आ रहे हैं। बड़ी समस्या गले के जाम होने से बोलने में परेशानी की है। बारिश के बावजूद मंगलवार को ईएनटी ओपीडी 187 तक पहुंच गई।
करीब 25 प्रतिशत मरीज 14 से 25 वर्ष की उम्र के हैं। नागरिक अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जयवर्धन के अनुसार, सर्दी के दौरान नाक बंद होना मामूली समस्या नहीं रह गई है। नाक बंद होने पर जब व्यक्ति गले से सांस लेता है तो ठंडी और सूखी हवा सीधे गले पर पड़ती है, जिससे गले की नमी खत्म हो जाती है और इंफेक्शन तेजी से पनपता है। यही वजह है कि इन दिनों ओपीडी में टॉन्सिलाइटिस, गले की सूजन और लगातार खराश के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि युवाओं में बढ़ते मामलों के पीछे मौसम से ज्यादा उनकी जीवनशैली जिम्मेदार है। देर रात तक मोबाइल पर रहना, ठंडा पानी पीने की आदत, कोल्ड ड्रिंक्स और फास्ट फूड, और नाक रुकने के बाद सांस न आने पर मुंह के जरिये सांस लेने गले में जलन और इंफेक्शन का काम कर रही है। साथ ही पर्याप्त नींद न लेना युवाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर रहा है। नतीजा यह है कि साधारण सर्दी भी सीधे गले पर असर डाल रही है और बीमारी जल्दी ठीक नहीं हो रही।
डॉ. जयवर्धन ने बताया कि गले की समस्या को नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर रूप ले सकता है। बार-बार टॉन्सिल का इंफेक्शन, आवाज बैठना, निगलने में दिक्कत और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं लंबे समय तक बनी रह सकती हैं। कई मामलों में यह संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचने का खतरा भी बढ़ा देता है। बदलते मौसम में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। ठंडे पेय पदार्थों से दूरी, गुनगुना पानी पीना, गले को ढककर रखना और शुरुआती लक्षण दिखते ही इलाज कराना बेहद जरूरी है, ताकि यह मौसम गले की सेहत पर भारी न पड़े।