संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन में चल रहे चातुर्मास के 46वें दिन महासाध्वी सुचेता महाराज ने पर्यूषण पर्व के पांचवें दिन में अर्जुन माली और सुदर्शन सेठ की कथा का विस्तार से वर्णन किया। प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में संगत जैन स्थानक पहुंची।
सुचेता महाराज ने बताया कि भगवान महावीर के समय की बात है, मगध जनपद की राजधानी राजगृही में अर्जुन नाम का एक माली रहता था। नगर के बाहर उसका एक सुंदर बगीचा था, जिसमें तरह तरह के पुष्पथे। अर्जुन इसी बगीचे से अपनी जीविका चलाता था। इसी बगीचे के पास मुद्गरपाणी यक्ष का एक प्राचीन मंदिर था, जिसमें हाथ में मुद्गर लिए हुए यक्ष की एक प्रतिमा थी।
अर्जुन बचपन से मुद्गरपाणी का भक्त था। वह प्रतिदिन अपनी फूलों की टोकरियां लेकर बगीचे में जाता और फूल चुनता। एक बार राजगृह में कोई उत्सव था। अर्जुन ने सोचा की इस अवसर पर फूलों की अच्छी बिक्री होगी। वह सुबह उठा और अपनी स्त्री को साथ लेकर बगीचे में पहुंचा। वहीं, राजगृह में ललिता नाम की गुंडों की टोली थी।
ये लोग चुपचाप मंदिर के किवाड़ों के पीछे छिप गए और जब माली और उसकी औरत यक्ष की पूजा कर रहे थे, तब गुंडे चुपके से किवाड़ों के पीछे से निकले और माली को रस्सी से बांध उसकी स्त्री के साथ अपनी भोग लिप्सा शांत की। उन्होंने कहा कि अर्जुन के ह्रदय में अपमान का दंश था, मन में तीव्र वेदना थी।
मुद्गरपाणी यक्ष ने सचमुच उसकी पुकार सुनी और वह उसके शरीर में प्रविष्ट हो गया। एक झटके के साथ उसके बंधन चूर चूर होकर बिखर गए। अब अर्जुन के हाथ में यक्ष का वह लोहे का मुद्गर भीम की गदा की तरह लहरा उठा और उसने एक झटके में उन छह गुंडों और अपनी स्त्री इन सातों की हत्या कर दी।
प्रवचन का श्रवण करने के लिए पहुंचे श्रद्धालु। आयेाजक