माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने करनाल के नरेश को 34 लाख रुपये की क्रिप्टो करेंसी की ठगी के मामले में गिरफ्तार किया है। नरेश कुमार (34 वर्ष) साइबर सिंडिकेट के लिए प्रोफेशनल बैंक खाते उपलब्ध करवाता था।
आरोपी ने नरेश ट्रैक्टर वर्कशॉप के नाम से कई बैंकों में दस से ज्यादा खाते खुलवाए थे। ये खाते भी आरोपी साइबर सिंडिकेट चलाने वाले सरगनाओं को देता था। उसे प्रति खाता 30 हजार रुपये कमीशन मिलता था। इन बैंक खातों के जरिए साइबर सरगना देशभर के लोगों से पैसे ठगते और उसे देश के बाहर तक भेजने का काम करते थे।
नरेश के ट्रैक्टर वर्कशॉप के नाम से बैंक खातों की पड़ताल की गई तो सामने आया कि इस खाते की राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर 13 शिकायतें पहले से दर्ज हैं।
ऐसे करते थे अपराध
दिल्ली पुलिस के क्राइम डीसीपी आदित्य गौतम ने बताया कि यह फ्रॉड कॉइन-एक्स क्रिप्टो ट्रेडिंग नाम से चल रहा था। आरोपियों की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों को बड़े मुनाफे का लालच देकर क्रिप्टो ट्रेडिंग में निवेश करने को प्रेरित किया जाता था। शुरुआत में मुनाफा दिखाया जाता लेकिन जब पीड़ित पैसा निकालने की कोशिश करते तो उन्हें या तो धमकाया जाता या भुगतान से इंकार कर दिया जाता।
13 शिकायतों से जुड़ा खाता
पुलिस के अनुसार साइबर ठगों ने एक पीड़ित से करीब 34 लाख की ठगी की। इसमें से लगभग नौ लाख कई खातों में ट्रेस हुए। जांच में नरेश ट्रैक्टर वर्कशॉप के खाते को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 13 शिकायतों से जुड़ा पाया गया। पूछताछ में नरेश ने स्वीकार किया कि उसने अपने खातों की चेकबुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी सरगनाओं को दे दी थीं। इससे वे दूर से ही खातों को चला धोखाधड़ी से हासिल रकम को इधर-उधर ट्रांसफर कर देते थे।
मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश
डीसीपी गौतम ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने पांच जून को साइबर पुलिस स्टेशन सेंट्रल दिल्ली में एफआईआर दर्ज कर ली है। इस गिरफ्तारी से साइबर अपराधियों की वह वित्तीय सप्लाई लाइन टूट गई है, जिसके जरिए वे निवेशकों से ठगी कर रकम को मनी लॉन्ड्रिंग में बदलते थे। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट के मास्टरमाइंड कौन हैं और अब तक कितनी रकम ठगी गई है।