- इस बार आयोजित पेरिस ओलंपिक में चार खिलाड़ियों ने बनाई थी जगह, शूटिंग, मुक्केबाजी, क्रिकेट और नौकायन में दिखा रहे जलवा
सुखदेव चौहान
करनाल। खेलों में कर्ण स्टेडियम के खिलाड़ी नित नए आयाम व कीर्तिमान रच जिले का नाम चमका रहे हैं। वहीं खिलाड़ियों की नई पौध उभरती प्रतिभा की मिसाल पेश कर रहे हैं। पहली बार जिले के चार खिलाड़ियों ने पेरिस ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया। इन खिलाड़ियों में शूटिंग में सेक्टर आठ के अनीश बनवाला व स्कीट शूटिंग में शामगढ़ की रायजा ढिल्लो शामिल रहीं।
वहीं मुक्केबाजी में कोट मोहल्ला के पेशेवर मुक्केबाज निशांत देव ने अपने पंच का दम दिखाया हालांकि वह अंतिम राउंड में हार गए। वहीं नौकायन में भी भारतीय सेना के सिपाही कैमला निवासी बलराज पंवार के अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं क्रिकेट में इंद्री के फाजिलपुर गांव का युवा ऑलराउंडर क्रिकेटर अंशुल कांबोज भी नाम कमा रहा है। उसने इस बार आईपीएल में दूसरी बार प्रतिभाग किया। अब वह इंग्लैंड के दौरे पर हैं। संवाद
राष्ट्रीय खेल में जीता स्वर्ण पदक
अंतरराष्ट्रीय शूटर अनीश बनवाला ने कभी मॉडर्न पेंथालॉन गेम से शुरुआत की थी। बेहतर प्रदर्शन के दम पर अनीश ने राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक अपने नाम किए। एशियाई शूटिंग चैंपियनशिप में क्वालीफाई कर पेरिस ओलंपिक का कोटा हासिल किया। हालांकि ओलंपिक में जीत नहीं पाए। इसी वर्ष अनीश ने देहरादून में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर जिले व प्रदेश का मान बढ़ाया है।
- अनिश बनवाला, शूटर
रणजी में 10 विकेट लेकर सुर्खियों में आए
इंद्री हलका के फाजिलपुर गांव निवासी ऑलराउंडर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर अंशुल कांबोज क्रिकेट जगत के उभरते सितारे हैं। पिछले साल रणजी में 23 वर्षीय गेंदबाज अंशुल कंबोज ने केरल के खिलाफ ग्रुप सी के मैच में 30.1 ओवर में 49 रन देकर 10 विकेट लिए। इसी प्रदर्शन की बदौलत वह सुर्खियों में आए और आईपीएल में दूसरी बार चेन्नई सुपर किंग में महंगे बेस प्राइज पर चयन हुआ। अब वह इंगलैंड के दौरे पर हैं।
- अंशुल कांबोज, क्रिकेटर
चुनौतियों का सामना कर बने बेहतर खिलाड़ी
पेरिस ओलंपिक में नौकायन की रोइंग स्पर्धा में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले घरौंडा के कैमला गांव निवासी बलराज पंवार भारतीय सेना में कार्यरत हैं। बचपन में पिता का निधन हो गया। चार बहनों के पालन पोषण की जिम्मेदारी चुनौती बन गई। आय का साधन केवल खेती थी मगर मां ने हौसला बढ़ाया तो सभी चुनौतियों का सामना करते हुए नौकायन का अभ्यास जारी रखा। उन्होंने उत्तर कोरिया में आयोजित नौकायन की रोइंग प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल करते हुए ओलंपिक के लिए टिकट पक्का किया।
- बलराज, नौकायन
छोटी उम्र में कमा रहीं नाम
रायजा ढिल्लों ने शूटिंग में पेरिस ओलंपिक का कोटा हासिल करने वाली जूनियर स्कीट स्पर्धा में देश की इकलौती शूटर रही। नीलोखेड़ी के शामगढ़ गांव की बेटी रायजा स्कीट निशानेबाजी की खिलाड़ी हैं। रायजा ने पिछले माह जर्मनी में आयोजित आईएसएसएफ जूनियर वर्ल्ड कप अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्कीट शूटिंग स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।
- रायजा ढिल्लो, शूटर
मेहनत के दम पर जमाई धाक
निशांत ने बचपन में अपने मामा का पोस्टर देखकर बॉक्सर बनने की ठान ली थी। वह जब पांचवीं में थे तभी कर्ण स्टेडियम में मुक्केबाजी के गुर सीखने के लिए पहुंच गए थे। उसके दादा कृष्ण देव व दादी रोशनी देवी निशांत को रोज सुबह अभ्यास करने जाने के लिए चार बजे जगा देते थे। आज निशांत पेरसि ओलंपिक, वर्ल्ड चैंपियनशिप या फिर प्रोफेशनल मुक्केबाजी सभी में अपनी धाक जमाए हुए हैं।
- निशांत देव, बॉक्सर
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अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में कमाया नाम
कर्ण स्टेडियम की खिलाड़ी चिड़ाव गांव निवासी तमन्ना तीन बहनों में से बीच की है। उनके पिता विष्णु तीनों बेटियों को बेहतर बॉक्सर बनाना चाहते हैं। वह तीनों बहनों को रोजाना यहां के बॉक्सिंग रिंग में अभ्यास के लिए लाते हैं। तमन्ना ने कजाखस्तान के अस्ताना में आयोजित यूथ एशियन चैंपियनशिप में पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया। इसके अलावा भी तमन्ना कई अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में भाग ले चुकी है।
- तमन्ना, बॉक्सर
परिवार से सीखे गुर
बॉक्सिंग में मानसी मलिक खिलाड़ियों के लिए मिसाल बनी हैं। मानसी को पहलवानी व मुक्केबाजी के गुर बचपन से ही परिवार से मिले और कर्ण स्टेडियम में अभ्यास किया। वह अभी 15 साल की हैं और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के दम पर जिले व अभिभावकों का नाम रोशन कर रही हैं। मानसी ने एशियन सब जूनियर अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग में रजत पदक जीतकर विदेशी धरा पर देश का परचम लहराया है।
- मानसी मलिक, मुक्केबाज