नमस्कार करना हमारी संस्कृति ही नहीं पहचान भी : डॉ. एमके गर्ग
- योग जागरूकता कार्यक्रम में पहुंचे कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के निदेशक
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. एमके गर्ग ने कहा कि नमस्कार या नमस्ते भारतीय संस्कृति का हिस्सा है, यदि हम नमस्ते करेंगे तो कोरोना जैसी बीमारी के लिए अति महत्वपूर्ण सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेसिंग) खुद व खुद बन जाती है। हमें अपनी संस्कृति को अपनाना चाहिए। वह मंगलवार को कर्णताल पर राजेश कौशिक के संयोजन में आयोजित योग शिविर को संबोधित कर रहे थे, उन्होंने लोगों से अपील की कि वह योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
कर्ण ताल पार्क में मंगलवार को योग जागरूकता और जन संवाद के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे डॉ. एमके गर्ग ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए योग और स्वच्छता को अपनाना जरूरी है। योग से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि मानसिक तनाव भी दूर होता है। उन्होंने कहा कि समाज में हर व्यक्ति तक योग की पहुंच जरूरी है, ताकि सभी लोग निरोग रह सकें। उन्होंने उदाहरण दिया कि वह पिछले दिनों वियतनाम गए थे, जब वहां के गाइड ने पूछा कि वह कहां से आए हैं तो जैसे ही उसे बताया कि वह इंडियन हैं, तो उसने तत्काल दोनों हाथ जोड़कर कहा नमस्ते। तात्पर्य ये है कि नमस्ते करना हमारी संस्कृति ही नहीं बल्कि पहचान भी है। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी। पौधरोपण भी किया। मौके पर संयोजक राजेश कौशिक, योग शिक्षक नवीन संदूजा आदि मौजूद रहे।