- अपने मन को प्रभु के श्री चरणों में लगा दो कल्याण होगा : आशीष सागर महाराज
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जुंडला गेट के श्री बांके बिहारी मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में शनिवार को कथा व्यास आशीष सागर महाराज ने मेरा मन बड़ा चंचल है.. मैं कैसे तेरा ध्यान करूं, जितना मैं इसे समझाऊं उतना ही मचल जाए.. तेरे चरणों की धूल अगर मिल जाए सच कहती हूं ये जीवन बदल जाए.. भजन को गाकर सभी को भाव विभोर कर दिया।
आशीष सागर महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि जब भी किसी व्यक्ति को लगे कि उसकी मृत्यु होने वाली है तो उसे ठाकुर जी के नाम का सुमिरन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने मन को प्रभु के श्री चरणों में लगा दो कल्याण होगा। मन की गति बड़ी तेज है इसलिए हमेशा गीता का पाठ करना चाहिए। 10 मिनट के लिए आसन पर बैठना चाहिए। खाना हमेशा जमीन पर बैठकर खाना चाहिए। सुबह उठने के बाद सबसे पहले अपने हाथ की हथेली को देखना चाहिए और उसके बाद योग करना चाहिए।
अगर आपका स्वास्थ्य ठीक है तभी तो आप कथा श्रवण कर पाओगे। आचार्य ने कहा कि हमें हमेशा अपने इंद्रियों को वश में रखना चाहिए तभी परमात्मा से मिलना होगा। उन्होंने कहा कि हम अपने सुंदर शरीर पर घमंड करते हो ये भी हमारा नहीं है। मरने के बाद इससे बदबू आती है। कभी भी जीवन में अभिमान नहीं करना चाहिए। आचार्य ने कहा कि मां बाप को अपने बच्चों को अच्छे संस्कार सिखाने के साथ गीता, रामायण और अन्य ग्रंथ पढ़ाने चाहिए ताकि वे संस्कारवान बन सके। आज युवा अपनी संस्कृति से दूर होते जा रहे है जो भारत के लिए एक खतरा है।