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म्हारी शहीदी खाली ना जावेगी, मरे पीछे तो आजादी आवेगी

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करनाल। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत मंचित नाटक दास्तान-ए-रोहनात आजादी के गुमनाम नायकों को समर्पित रहा। सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कलाकारों ने दास्तान-ए-रोहनात नाटक का जीवंत मंचन किया। गुरु नानक खालसा कॉलेज में नाटक मंचन के दौरान जब अंग्रेजों पर भारतीय ग्रामीणों ने हमला किया तो भारत मां की जयकारों से सभागार गूंज उठा।
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नाटक में जब ग्रामीणों को तोप से उड़ाया गया तो उन्होेंने जोशीले अंदाज में कहा कि ‘म्हारी शहीदी खाली न जावेगी, मरे पीछे तो आजादी आवेगी’। इस दृश्य के बाद जैसे ही तोप से गोले निकले दर्शक भाव विभोर हो गए। वहीं जब ग्रामीणों ने अंग्रेज अफसरों को घेर कर मारा तो भारत मां की जय.. और हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे भी लगे। हिसार के अभिन्य रंगमंच के कलाकारों ने मनीष जोशी द्वारा निर्देशित व यशराज शर्मा द्वारा लिखित नाटक में रोहनात गांव की गाथा आजादी के संघर्ष को दिखाया।
भिवानी के छोटे से गांव रोहनात के गुमनाम महानायकों पर आधारित नाटक में कलाकारों ने नोन्दा जाट, बिरड़ा दास और रूप राम खाती और गांव के लोगों के आजादी के लिए कड़े संघर्ष को इस नाटक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। नाटक में गांव की क्रांति के साथ-साथ अंग्रेजों की कूटनीतिक चालों, डिवाइड एंड रूल पॉलिसी, अत्याचार सहित कई अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को प्रस्तुत किया गया था।
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विभाग के उप निदेशक देवेंद्र शर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मेयर रेणू बाला गुप्ता ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। विशिष्ट अतिथि के तौर पर भाजपा जिलाध्यक्ष योगेन्द्र राणा, सीएम के प्रतिनिधि संजय बठला, मीडिया समन्वयक जगमोहन आनंद शामिल हुए। कॉलेज के प्रिंसिपल गुरिंद्र सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी ने दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का आगाज किया।
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हम अंग्रेजां के बटेऊ.. पर लगे ठहाके
नाटक प्रस्तुत किए गए वंदे मातरम गीत पर दर्शकों ने खड़े होकर गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि दी। नाटक में रोहनात के कुंए का इतिहास भी दिखाया कि कैसे अत्याचार के चलते गांव का कुंआ जलियांवाला बाग की तरह ग्रामीणों की लाशों से भर गया था। इससे पहले दर्शाया गया कि जब गांव में अंग्रेज अधिकारी आते हैं और वे कहते हैं कि तुम लोग हमें क्या समझते हो, तो ग्रामीण उन्हें जैसे ही कहते हैं कि हम अंग्रेजां के बटेऊ हैं.. इस पर सभागार ठहाकों से गूंज उठा।
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देश के लिए हर सड़क को लाल बनाने को तैयार
नाटक में कलाकारों ने दर्शाया कि हांसी में अंग्रेजों की छावनी पर ग्रामीणों ने हमला बोला और उनके खजाने लूटे। अंग्रेजों ने ग्रामीणों को तोपों से उड़ा दिया और कुछ ग्रामीणों पर रोड रोलर चलाए गए, जिसकी वजह से हांसी की सड़क का नाम लाल सड़क है। इस दौरान कलाकारों ने कहा कि देश को गुलामी की जंजीरों से छुड़वाने के लिए वे हर सड़क को इसी तरह से लाल कराने को तैयार हैं।
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