करनाल। महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल, पब्लिक सेक्टर में ड्रोन सेवा प्रदान करने वाला देश का पहला विश्वविद्यालय बन गया है। विश्वविद्यालय ने करीब 20 लाख रुपये में दो नए ड्रोन खरीदे हैं, जिनका बृहस्पतिवार को खेती खासकर बागवानी क्षेत्र में उपयोगिता बताने के लिए प्रदर्शन किया गया। आने वाले समय में प्रति एकड़ में पैदावार और फसलों में बीमारी का अनुमान लगाने के लिए भी इनका प्रयोग किया जाएगा। यहां ड्रोन संचालन के लिए प्रशिक्षण देकर ड्रोन पायलट भी तैयार किए जाएंगे।
महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल के कुलपति प्रो. समर सिंह ने बताया कि एमएचयू ने दो ड्रोन खरीदे हैं। इससे किसानों के खेतों में ड्रोन की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके अलावा एमएचयू द्वारा एक ट्रेनिंग सेंटर चालू किया जाएगा, जहां पर ड्रोन के पायलट तैयार कर लाइसेंस दिए जाएंगे ताकि आगे वो भी ड्रोन के एक्सपर्ट हो जाएं और प्रदर्शनी लगाने में सहायता करें। बागवानी फसलों में गन्ना, मक्का या बाग में आमतौर पर स्प्रे अच्छी प्रकार से नहीं हो पाता है, जबकि ड्रोन से बिल्कुल सटीक स्प्रे होगा। इससे पानी की भी बचत होगी। ड्रोन तकनीक बागवानी के क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित होगी। कुलपति ने बताया कि ड्रोन में अलग-अलग रडार और सेंसर लगे हुए हैं और इसे रिमोट से कंट्रोल किया जाता है। स्प्रे करने के बाद उसी स्थान पर अपने आप वापस आ जाता है, जिस स्थान से उड़ान भरी थी। एक एकड़ में दस लीटर दवा और पानी का घोल करीब 8 मिनट में छिड़काव किया जाता है। इससे लेबर व समय की बचत होगी। इस मौके पर रजिस्ट्रार डॉ. अजय सिंह, एसोसिएट डायरेक्टर एक्सटेंशन डॉ. सुतेंद्र यादव, डॉ. बिमला, ईओ सुरेश सैनी, एक्सईएन अनुज गुप्ता, एचटीआई प्रिंसिपल जोगिंद्र सिंह, सीईओ दीपक भारद्वाज, धीरज, निशा सोलंकी, बागवानी विभाग से दिनेश कुमार व मांगे राम आदि मौजूद रहे।