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Karnal News: शहादत के बाद मां को मिली थीं बेटे की चार चिट्ठियां

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- बल्ला गांव निवासी गुलाब सिंह ने कारगिल युद्ध में दी थी शहादत
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जय भगवान अत्री

मूनक। शहीद गुलाब सिंह की 76 वर्षीय मां मैहरो देवी को कारगिल युद्ध में शहादत के बाद उनकी लिखी चार चिट्ठियां मिलीं थीं। जो आज भी उनके पास हैं। इन चिट्ठियों को पढ़कर उनकी आंखें आज भी नम हो जाती हैं। जिसमें गुलाब सिंह ने परिवार व गांव के बारे में पूछा है और कारगिल युद्ध के बाद आने की बात कही थी।

मां ने बताया कि बेटा गुलाब 12वीं में पढ़ रहा था कि फौज में भर्ती हो गया। मुझे गर्व है बेटे पर जो देश के काम आया। उन्होंने बताया कि उसके शहीद होने के बाद बेटे की चार चिट्ठियां मिलीं, कारगिल के युद्ध में देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीद गुलाब सिंह के नाम पर गांव में एक लाइब्रेरी बनाई गई, लेकिन यहां कभी किताबें नहीं आ सकीं। उनकी मां और भाई को मलाल है कि शहीदी दिवस पर सरकार देश के वीर सपूत की प्रतिमा पर एक फूल तक नहीं चढ़ाती। गांव वासी ही परिजनों के साथ ही शहीद गुलाब सिंह का शहीदी दिवस मनाते हैं।
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करगिल युद्ध के दौरान चोटी संख्या 5299 पर लड़ते हुए गुलाब सिंह शहीद हो गए थे। वह फरवरी 1997 में भर्ती हुए और 21 जून 1999 को कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की आहुति दे दी। पिता किसान थे और गुलाब सिंह पढ़ाई में होनहार थे। आज उन्हें परिवार और देशवासी तो याद करते हैं, लेकिन सरकार ने भुला दिया है। सांसद निधि से गांव में शहीद गुलाब सिंह के नाम से एक लाइब्रेरी बनाई गई, लेकिन ऐसी लाइब्रेरी किस काम की, जहां पुस्तकें ही न हों। पंचायत ने इस बाद लाइब्रेरी और प्रतिमा के आसपास सफाई तो कराई है, अन्यथा गुलाब सिंह की प्रतिमा के आसपास गंदगी के ढेर लगे रहते थे। संवाद
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