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Karnal News: पुरुषों से ज्यादा महिलाएं हो रहीं थायराइड का शिकार

Mon, 25 May 2026 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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करनाल। विश्व थायराइड दिवस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को थायराइड बीमारी के प्रति जागरूक रहने की अपील की है। डॉक्टरों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं में थायराइड के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। खराब खानपान, तनाव, अनियमित दिनचर्या और हार्मोनल बदलाव इसके प्रमुख कारण हैं। समय रहते जांच और इलाज न होने पर यह बीमारी शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकती है।
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जिला नागरिक अस्पताल के प्रवक्ता डॉ. दीपक गोयल ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में हर महीने 100-150 नए थायराइड मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में काफी अधिक है। उन्होंने बताया कि थायराइड शरीर की एक महत्वपूर्ण ग्रंथि है, जो हार्मोन बनाकर शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। जब इस ग्रंथि में गड़बड़ी आती है तो शरीर में कई तरह के बदलाव दिखाई देने लगते हैं।

ये हैं मुख्य लक्षण

विशेषज्ञों के अनुसार, थायराइड दो प्रकार का हाइपोथायराइडिज्म और हाइपरथायराइडिज्म होता है। हाइपोथायराइडिज्म में हार्मोन कम बनने लगता है। थकान, वजन बढ़ना, कब्ज, बाल झड़ना, त्वचा रूखी होना और मासिक धर्म में अनियमितता बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं। हाइपरथायराइडिज्म में हार्मोन अधिक बनने लगता हैं। वजन कम होना, घबराहट, तेज धड़कन, हाथ कांपना, पसीना ज्यादा आना और नींद न आने जैसी परेशानियां होती हैं।
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लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

जनरल फिजीशियन डॉ. प्रिया दलाल का कहना है कि कई लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य कमजोरी समझकर अनदेखा कर देते हैं। इससे बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। कुछ मामलों में गर्दन में गांठ या सूजन दिखाई देने लगती है और थायराइड कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए समय-समय पर जांच करवाना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव से दूरी और पर्याप्त नींद लेकर थायराइड की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। आयोडीन युक्त नमक का सेवन और नियमित हेल्थ चेकअप भी जरूरी है। उन्होंने धूम्रपान और शराब से दूरी बनाने की भी सलाह दी है।

गर्भावस्था के बाद से तेजी बढ़ता है खतरा

महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. नीतिका पाहुजा के अनुसार महिलाओं में गर्भावस्था, डिलीवरी के बाद होने वाले हार्मोनल बदलाव, तनाव और पर्याप्त नींद न लेने के कारण यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। परिवार में पहले से किसी सदस्य को थायराइड होने पर इसकी संभावना और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि विश्व थायराइड दिवस हर साल 25 मई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना और समय पर जांच व उपचार के लिए प्रेरित करना है।
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