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दो लाख से अधिक परिवारों का बिजली बिल होगा आधा

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पिछले दिनों लॉकडाउन से जूझते लोगों को उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम ने तोहफा दिया है। 150 यूनिट तक प्रति माह विद्युत खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं को दो रुपये प्रति यूनिट की राहत दी गयी है। अब उन्हें 4.50 रुपये प्रति यूनिट प्रतिमाह की बजाय सिर्फ 2.50 रुपये प्रति यूनिट प्रतिमाह की दर से ही बिजली का भुगतान करना होगा, जिससे उनका घरेलू बिजली का बिल करीब आधा हो जाएगा। नई दरें एक जून 2020 से लागू की गई हैं।
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पिछले दिनों प्रधानमंत्री ने बड़े राहत पैकेज के ऐलान के साथ ही बिजली कंपनियों को भी बड़ी धनराशि देने की बात कही, लेकिन बिजली के बिलों पर कोई राहत नहीं मिली तो उपभोक्ताओं की समझ में नहीं आया कि आखिर बिजली कंपनियों को किस बात की सहायता राशि दी गई है। अब उसका फायदा उपभोक्ताओं को मिलना शुरू हो जाएगा। निगम के कामर्शियल असिस्टेंट (सीए) प्रदीप कुमार ने बताया कि उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम ने विद्युत दरों का नया स्लैब और नए टैरिफ जारी कर दिए हैं, जिसके अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं में शून्य से 50 यूनिट तक प्रतिमाह बिजली खर्च करने वालों को अब 2.70 रुपये प्रति यूनिट की बजाय दो रुपये प्रति यूनिट तथा 50 से 150 यूनिट प्रतिमाह बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को 4.50 रुपये प्रति यूनिट की बजाय अब 2.50 रुपये प्रति यूनिट प्रतिमाह की दर से बिजली का बिल देना होगा। हालांकि 150 से 250 यूनिट तक पहले की भांति ही 5.25 रुपये प्रति यूनिट प्रतिमाह व 250 से 500 यूनिट तक 6.30 रुपये प्रति यूनिट प्रतिमाह ही देय होगा। 500 से 800 यूनिट तक 7.10 रुपये प्रति यूनिट प्रतिमाह देय है। लेकिन यदि किसी की बिजली की खपत 800 यूनिट से अधिक है तो उस पर कोई भी स्लैब लागू नहीं होगा, उसे सीधे 7.10 रुपये प्रति यूनिट की दर से ही भुगतान करना होगा। हालांकि 500 यूनिट तक के डोमेस्टिक कनेक्शन पर पहले सब्सिडी मिलती थी, जिस पर नए दिशा निर्देश शीघ्र ही प्राप्त होने वाले हैं।
बड़ी राहत : लघु उद्यमियों को अब बिजली खपत के आधार पर ही चुकाना होगा बिल
एमएसएमई की उद्यमियों को बिजली निगम ने दी बड़ी राहत, लॉकडाउन में बंद रही थीं फैक्ट्रियां
करनाल। बिजली निगम द्वारा जारी नए स्लैब में 50 केवी के कनेक्शन क्षमता वाली औद्योगिक इकाइयों को बड़ी राहत दी गई है। इनसे अब फिक्स चार्जेज को तोड़ते हुए अब सिर्फ बिजली के व्यय के आधार पर ही बिल वसूला जाएगा।
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लॉकडाउन में अधिकांश छोटी बड़ी सभी औद्योगिक इकाइयां बंद रहीं, लेकिन इन सभी औद्योगिक इकाइयों का बिजली बिल फिक्स होने के कारण उनके कनेक्शन की क्षमता के अनुसार ही देना पड़ा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी उद्यम का कनेक्शन 50 केवी का है, तो 160 रुपये प्रति किलोवाट प्रति माह का फिक्स चार्ज पूरा ही देना पड़ा, भले ही लॉकडाउन के दौरान बिजली खपत दो या तीन केवी ही हुई। औद्योगिक संगठन, व्यापार मंडल आदि शुरू से ही यह मांग करते रहे कि जब बिजली खर्च हो ही नहीं रही, तो आखिर उनके फिक्स चार्ज कनेक्शन की क्षमता के अनुसार क्यों वसूले जा रहे हैं ? अमर उजाला ने भी उद्यमियों की आवाज को उठाया था। अब बिजली निगम ने इस पर नया स्लैब जारी कर दिया है। बिजली निगम के कामर्शियल असिस्टेंट प्रदीप कुमार ने बताया कि नया स्लैब 01 जून-2020 से लागू हो गया है, जिसके तहत अब 50 केवी तक के औद्योगिक एलटी कनेक्शन पर फिक्स चार्ज को बिजली की खपत के अनुसार ही वसूला जाएगा। यानी यदि किसी इंडस्ट्रीज का विद्युत कनेक्शन 50 केवी क्षमता का है, लॉकडाउन के दौरान उसकी विद्युत खपत पांच या दस केवी ही है, तो उसे 50 केवी पर नहीं बल्कि पांच या दस केवी पर ही फिक्स चार्जेज यानी 160 रुपये प्रति केवी प्रति माह की दर से बिल का भुगतान करना है। लेकिन 50 केवी से अधिक क्षमता से अधिक वाले कनेक्शन वाली औद्योगिक इकाइयों को कोई राहत नहीं दी गई है।
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