करनाल। दिल्ली के एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन अग्नि सुरक्षा के बारे में सक्रिय नजर आ रहा है। स्थिति खतरनाक भी है। शहर के बाजारों में 95 प्रतिशत से अधिक दुकानों और शोरूम के पास फायर एनओसी नहीं है।
शहर के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में हजारों लोग रोजाना खरीदारी करने पहुंचते हैं लेकिन आग लगने जैसी आपात स्थिति में यहां से सुरक्षित निकलना मुश्किल हो सकता है। कई बाजार ऐसे हैं जहां दमकल विभाग के बड़े वाहन तक नहीं पहुंच सकते। अगर किसी बहुमंजिला इमारत या भीड़भाड़ वाले बाजार में आग लग गई तो जानमाल का नुकसान रोकना लगभग असंभव हो सकता है।
शहर के सबसे पुराने और व्यस्त बाजारों में शामिल कर्ण गेट, पुरानी गुड़ मंडी, तेलियान गली, युवराज मार्केट और मछली मार्केट की गलियां इतनी संकरी हैं कि चारपहिया वाहन निकालना कई बार मुश्किल हो जाता है। इन बाजारों में हजारों दुकानें और गोदाम संचालित हैं, जहां बड़ी मात्रा में कपड़ा, प्लास्टिक, कागज, लकड़ी और अन्य ज्वलनशील सामान रखा रहता है। गर्मी के मौसम में बिजली की खपत बढ़ने से ट्रांसफार्मर और तारों पर अतिरिक्त लोड पड़ रहा है। कई स्थानों पर बिजली के तार मकड़जाल की तरह लटके हुए हैं। ऐसे में शॉर्ट सर्किट की आशंका रहती है। अगर आग लगती है तो संकरी गलियों के कारण दमकल कर्मियों को पैदल पहुंचकर राहत कार्य करना पड़ सकता है।
दमकल अधिकारी दीपक का कहना है कि वे रोजाना शहर के प्रतिष्ठानों को दौरा कर नोटिस थमा रहे हैं। नोटिस में 30 दिन की मोहलत के साथ कार्रवाई की चेतावनी भी दी जा रही है। इस बारे में मुख्यालय भी लिखा गया है।
अतिक्रमण ने बढ़ाया खतरा
खतरा केवल पुराने बाजारों तक सीमित नहीं है। शहर के बड़े और आधुनिक माने जाने वाले बाजार भी फायर सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतर रहे। नेहरू पैलेस, सर्राफा बाजार, दुपट्टा मार्केट, कुंजपुरा रोड और पुरानी सब्जी मंडी जैसे प्रमुख बाजारों में दिनभर जाम जैसे हालात बने रहते हैं। सड़कों पर दुकानों के बाहर रखा सामान, रेहड़ियां, अवैध पार्किंग और अतिक्रमण के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं। ऐसी स्थिति में किसी आपातकालीन वाहन का मौके तक पहुंचना चुनौती बन सकता है। व्यापारिक क्षेत्रों में कई बहुमंजिला इमारतें ऐसी हैं जहां आग बुझाने के प्राथमिक उपकरण भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं।
पहले भी हो चुके अग्निकांड
शहर के विभिन्न बाजारों में पहले भी कई बार आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कई मामलों में दमकल विभाग को मौके तक पहुंचने में देरी हुई क्योंकि रास्ते जाम और अतिक्रमण से घिरे मिले। आग लगने के शुरुआती दस मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन अगर दमकल वाहन समय पर नहीं पहुंच पाए तो छोटी घटना भी बड़े हादसे में बदल सकती है। 28 मई को क्लब मार्केट के पास कूड़े में लगी आग दो कारों में जा लगी और दोनों कारें जल गई। 20 मई को घरौंडा के मेन बाजार में बर्तन की दुकान में आग लगी। 15 फरवरी को पुरानी सब्जी मंडी में होलसेलर की दुकान में आग लगी। इन मामलों में दुकानदारों और मालिकों का लाखों का नुकसान हुआ। अगर समय से दमकल पहुंच जाती तो नुकसान कम होता।
गुड मंडी की तंग गली । संवाद
गुड मंडी की तंग गली । संवाद